मंगलवार, मई 17, 2022
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होमहिंदीक्या है जामिया मिल्लिया इस्लामिया और AMU में लगे नारों का सच?

क्या है जामिया मिल्लिया इस्लामिया और AMU में लगे नारों का सच?

Claim

सोशल मीडिया पर दो वीडियो चर्चा का विषय बने हुए हैं एक वीडियो अलिगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी का है और दूसरा दिल्ली के जामिया युनिवर्सिटी का, दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने हिंदुओं को लेकर नारेबाजी की है। 

 

हिंदुओं की कब्र खुदेगी, AMU की छाती पर.यह भारत में सुनने को मिल रहा है भाई

 

 
 
 
 
 
Verification
 
Video 1: जामिया मिल्लिया इस्लामिया
 
 
 
इस वीडियो को देखने के बाद सबसे पहले हमने इसकी पुष्टि की कि ये वीडियो जामिया युनिवर्सिटी के बाहर ही बनाया गया है या नहीं। इसकी पहचान हमने वीडियो में दिखाई दे रहे युनिवर्सिटी गेट से की, जिससे पता चलता है कि ये प्रदर्शन युनिवर्सिटी के गेट न. 8 के बाहर हो रहा था। 
 
 
 
 
इसके बाद हमने वीडियो को कई बार ध्यान से सुना जिससे हमें पता चला कि यहां छात्रों ने जो नारा लगाया वो था “आजादी… हम लेकर रहेंगे आज़ादी… अमित शाह से आज़ादी, मोदी से आज़ादी, हिंदुओं से आज़ादी, हम छीनकर लेंगे आज़ादी, हम लड़कर लेंगे आज़ादी”
 
इसके बाद हमने जामिया के ही एक छात्र से बात की जिसने हमें बताया कि जिस वक्त ये वीडियो बनाया गया वो वहीं मौजूद था और वहां केवल जामिया के ही छात्र नहीं थे कई छात्र दिल्ली युनिवर्सिटी से भी प्रदर्शन का समर्थन करने आए थे। अपनी पहचान न बताने के आग्रह के साथ छात्र ने ये भी बताया कि वहां मौजूद छात्र अलग-अलग नारे लगा रहे थे। कई छात्र हिंदुत्व से आज़ादी चिल्ला रहे थे तो कुछ हिंदुओं से आज़ादी। छात्र ने इस वीडियो के सही होने की भी पुष्टि की है। 
 
जबकि The Quint और BoomLive ने अपने फैक्ट चेक में इस वीडियो को भ्रामक बताते हुए लिखा है कि जामिया में हिंदुओं नहीं हिंदुत्व कहा गया है। साथ ही पत्रकार Rajdeep Sardesai ने भी कहा था कि जामिया में इस तरह के नारे नहीं लगे हैं। 
 
 
 
 
 
Video 2: अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी (AMU)
 
बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष संतोष रंजन राय ने अपने ट्विटर हैंडल पर प्रदर्शन कर रहे लोगों का एक वीडियो शेयर किया है। पोस्ट में दावा किया गया है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन करते समय हिंदुओं के खिलाफ भी नारे लगाए। दावा किया गया है कि छात्र हिंदुओं की कबर खुदेगी एमयू की छाती पर कहते नजर आ रहे हैं। 
 
हमनें इस पोस्ट को लेकर पड़ताल शुरू की तो एक और पोस्ट देखने को मिला।
 
 
 
एक और ट्वीट  मिला जिसमें यही उल्लेख किया गया है। 
 
 
इसके अलावा दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तेजिंदरपाल बग्गा ने भी यह वीडियो शेयर किया है। 
 
 
अमित मालवीय ने भी इसी दावे के साथ यह वीडियो शेयर किया है।
 
 
 
इसके अलावा फेसबुक पर भी यह वीडियो इसी दावे के साथ वायरल हो रहा है।
 
 
हमनें वीडियो में प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए नारे कई बार बारीकी से सुने तो पता चला कि नारों में हिंदुओं का नहीं बल्कि हिंदुत्व का उल्लेख प्रदर्शनकारी कर रहे हैं। बारीकी से सुनने पर आपको सुनाई देगा कि छात्र  “हिंदुत्व की कब्र खुदेगी, AMU की छाती पर, सावरकर की कब्र खुदेगी, AMU की छाती पर, ये बीजेपी की कब्र खुदेगी, AMU की छाती पर, ब्राह्मणवाद की कब्र खुदेगी, AMU की छाती पर, ये जातीवाद की कब्र खुदेगी AMU की छाती पर  यह नारे लगा रहे हैं। 
 
 
 
 
 
 
 
 
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Result
 
Video 1: True
Video 2: Misleading
 
 
 
Note: हम अपने पाठकों से निवेदन करते हैं कि किसी भी प्रकार के संदिग्ध संदेशों को बिना जांचे शेयर न करें
 
 
 
(किसी संदिग्ध ख़बर की पड़तालसंशोधन या अन्य सुझावों के लिए हमें WhatsApp करें: 9999499044)
Rajneil Kamath
Rajneil Kamath
Rajneil began his career in Google with Adwords Content Operations, moved to sales and then to Public Policy and Government Affairs. During his tenure at Google, he got a first-person view of content policy, community guidelines, product policy, and other public policy issues. Post his stint at Google, he founded a technology company before establishing Newschecker. He calls himself a product of the internet and mobile era and is determined to combat disinformation online. He looks after the day to day affairs and management of the organisation and does not participate in the editorial decisions of Newschecker.
Rajneil Kamath
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Rajneil began his career in Google with Adwords Content Operations, moved to sales and then to Public Policy and Government Affairs. During his tenure at Google, he got a first-person view of content policy, community guidelines, product policy, and other public policy issues. Post his stint at Google, he founded a technology company before establishing Newschecker. He calls himself a product of the internet and mobile era and is determined to combat disinformation online. He looks after the day to day affairs and management of the organisation and does not participate in the editorial decisions of Newschecker.

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