गुरूवार, अक्टूबर 6, 2022
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अबू धाबी के क्रॉउन प्रिंस ने नहीं किया जय सियाराम का जाप, सोशल मीडिया में वायरल हुई भ्रामक क्लिप

Claim

अबुधाबी में क्राउन प्रिंस ने जय सिया राम का जाप किया और मुस्लिम महिला ने रामायण ग्रंथ को अपने सिर पर ले लिया। लाखों हिंदुओं के लिए पूजनीय भगवान राम की दुनियाभर में इस तरह पूजा की जाती है। 

 

 
Verification
 
Geetika Swami नामक ट्विटर हैंडल से एक वीडियो शेयर किया गया है। वीडियो को लेकर दावा किया गया है कि अबूधाबी क्राउन प्रिंस ने जय सिया राम नाम का जाप किया और मुस्लिम महिला ने रामायण ग्रंथ को अपने सिर पर ले लिया।
 
 
 
 
 
 
 
यही दावा करने वाला एक वीडियो भी युट्यूब पर मिला। 
 
 
 
वहीं सात महीने पहले का एक फेसबुक पोस्ट मिला इसमें यह वीडियो शेयर किया गया था। इस पोस्ट में दावा थोड़ा अलग किया गया था।
 
 
 
 
वीडियो में रामचरित मानस के कथाकार मोरारी बापू भी नजर आ रहे थे इसलिए पड़ताल को आगे बढ़ाया तो पिछले साल का एक ट्वीट मिला।
 
 
 
कुछ कीवर्ड्स की मदद से हमनें अबूधाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान द्वारा जय सिया राम का जाप जपने की खबर को ढूंढा। लेकिन हमें इस तरह की कोई खबर नहीं मिली। खोज जारी रखने के बाद हमें मोरारी बापू के आधिकारिक युट्यूब अकाउंट पर वीडियो मिला।
 
 
 
 
इस वीडियो से पता चला कि रामकथा में शामिल और जय सियाराम का नारा लगाने वाले शख्स अबूधाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान नहीं बल्कि यूएई के स्तंभकार सुल्तान सूद अल कासेमी हैं। वीडियो में एक अज्ञात वक्ता को मेहमानों की सूची की घोषणा करते हुए सुना जा सकता है। हालांकि, इस सूची में क्राउन प्रिंस के नाम की घोषणा नहीं की गई थी। साथ ही वे कार्यक्रम में शामिल लोगों में कहीं पर भी नजर नहीं आए। 
 
इससे साफ होता है कि कार्यक्रम में अबू धाबी के सुल्तान ने नही बल्कि स्तंभकार सुल्तान सूद अल कासेमी ने जय सियाराम का नारा लगाया था। वहीं दूसरा दावा भी गलत साबित साबित हुआ। रामायण को सिर पर लेने वाली महिला अबुधाबी के क्राउन प्रिंस के घराने से नहीं थी बल्कि आयोजक की बेटी थी। इस बारे में मोरारी बापू ने एक टीवी चैनल को जानकारी दी थी। 
 
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Result- Misleading
Yash Kshirsagar
Yash Kshirsagar
After completing his post-graduation, Yash worked with some of the most renowned newspapers such as like Lokmat, Dainik Bhaskar & Navbharat for the past 6 years. To make sure that no incorrect news reaches people and to maintain peace and harmony in society, he chose to become a fact-checker.
Yash Kshirsagar
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After completing his post-graduation, Yash worked with some of the most renowned newspapers such as like Lokmat, Dainik Bhaskar & Navbharat for the past 6 years. To make sure that no incorrect news reaches people and to maintain peace and harmony in society, he chose to become a fact-checker.

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