सोमवार, नवम्बर 28, 2022
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जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गाँधी की रूस यात्रा की तस्वीर को यूएस का बताकर किया गया शेयर

Claim

पंडित जवाहरलाल नेहरु और इंदिरा गांधी 1954 में जब अमेरिका गए थे तब उनके स्वागत के लिए भारी संख्या में भीड़ जुटी थी। इसके लिए स्पेशल पीआर कैंपेन नहीं करना पड़ा था।

Verifcation
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा सांसद शशि थरूर ने अपने ट्विटर हैंडल पर पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी की एक फोटो शेयर की थी। थरूर ने दावा किया था यह फोटो नेहरु और इंदिरा 1954 में अमेरिका गए थे तब की है। वहां बिना किसी विशेष संपर्क अभियान या प्रचार किए ही उनके स्वागत में एनआरआई और अमेरिकी नागरिकों की भारी संख्या में भीड़ जुट गई थी।
शशि थरुर द्वारा पोस्ट किए गए फोटो को लेकर कई कमेंट्स पढ़ने को मिले जिसमें से एक कमेंट में लिखा था कि, यह फोटो अमेरिका की नहीं बल्कि रुस की है।
इसलिए हमनें इस फोटो को लेकर पड़ताल शुरू की। पड़ताल के दौरान कांग्रेस के नेता कमल किशोर द्वारा इस तस्वीर के साथ यही दावा करने वाला ट्वीट मिला।
हमनें पड़ताल जारी रखी। इस दौरान पता चला कि शशि थरुर के ट्वीट पर कई यूजर्स ने कमेंट किए थे। जिनमें कई वरिष्ठ पत्रकार थे। यूजर्स के मुताबिक यह तस्वीर उस समय की है जब साल 1956 में नेहरु और इंदिरा गांधी रुस के मास्को गए थे।
हमनें इस फोटो की सच्चाई जानने के लिए गूगल रिवर्स इमेज और यांडेक्स में सर्च किया तो इसके कई रिजल्ट्स सामने आए। कई खबरों में इस तस्वीर के साल 1956 में रुस के मास्को में खींचे जाने का दावा किया गया है।
वही हमें खोज के दौरान एक और वेबसाइट का लेख मिला जिसमे बताया गया था कि यह फोटो 1955 की है।
इससे साफ होता है कि शशि थरुर ने गलत दावे के साथ ट्वीट किया था। इस ट्वीट को लेकर वे सोशल मीडिया में ट्रोल हुए तो उन्होंने अपनी गलती मानी और ट्वीट कर बताया कि यह अमेरिका नहीं रुस की फोटो है।
इससे साबित होता है कि पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी की यह फोटो रुस में 1955 में खींची गई थी जिसे अमेरिका का बताकर शेयर किया गया।
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Result- misleading
Yash Kshirsagar
Yash Kshirsagar
After completing his post-graduation, Yash worked with some of the most renowned newspapers such as like Lokmat, Dainik Bhaskar & Navbharat for the past 6 years. To make sure that no incorrect news reaches people and to maintain peace and harmony in society, he chose to become a fact-checker.
Yash Kshirsagar
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After completing his post-graduation, Yash worked with some of the most renowned newspapers such as like Lokmat, Dainik Bhaskar & Navbharat for the past 6 years. To make sure that no incorrect news reaches people and to maintain peace and harmony in society, he chose to become a fact-checker.

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