सोमवार, अक्टूबर 25, 2021
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महाबलीपुरम में नरेंद्र मोदी की सुरक्षा पर नहीं खर्च हुए 20 करोड़ रुपये, पुरानी तस्वीरों के साथ वायरल हुआ भ्रामक सन्देश

Claim

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाबलीपुरम तट पर 2 रुपए का कचरा बीना लेकिन उनकी सुरक्षा और शूटिंग में 20 करोड़ खर्च हुए। 

 
 
 
Verification-
 
ट्विटर पर शिल्पी सिंह नामक हैंडल से पीएम नरेंद्र मोदी को लेकर एक ट्वीट शेयर किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री ने दो दिन पहले तमिलनाडु के महाबलीपुरम तट पर सिर्फ 2 रुपए का कचरा बीना लेकिन उनकी सुरक्षा और शूटिंग में 20 करोड़ रुपए खर्च हुए।
   
 
 
 
 
ट्वीट में किए गए दावे को लेकर हमनें पड़ताल शुरू की। गूगल में कुछ कीवर्ड्स की मदद से खोज की तो पीएम मोदी द्वारा महाबलीपुरम तट पर कचरा बीनने की कई खबरों के रिजल्ट सामने आए।
 
 
 
पीएम मोदी द्वारा महाबलीपुरम के समुन्द्र तट पर कचरा बीनने की ख़बरें दैनिक भास्करजनसत्ताइकोनोमिक टाइम्स आज तक समेत देशभर के टीवी चैनल और समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई है। लेकिन इन खबरों में कहीं पर भी समुन्द्र तट पर शूटिॆग और सुरक्षा के लिए 20 करोड़ खर्च होने का जिक्र नहीं है।
 
ट्वीट में शेयर किए गए फोटोज को लेकर हमें शक हुआ तो हमनें इसकी पड़ताल शुरू की। इसके लिए गूगल रिवर्स इमेज और यांडेक्स की मदद ली। 
 
पहली फोटो को लेकर हमनें खोज की तो यांडेक्स में हमें इस फोटो के रिजल्ट मिले। यह फोटो पीएम मोदी के लिए महाबलीपुरम तट पर शूटिंग कर रहे क्रू मेंबर्स की नहीं है बल्कि यूके के एक इंस्टीट्यूट की है जिसे पिछले साल क्लिक किया गया था।
 
 
 
साथ ही दूसरी फोटो को लेकर भी सच्चाई सामने आई कि यह करीब 6 महीने पहले की है। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री कोझीकोड में रैली करने गए थे। उनके पहुंचने से पहले वहां पर हाई सिक्योरिटी का प्रबंध किया गया था। उसी दौरान जांच करते बम निरोधक दस्ते की फोटो खींची गई थी। यह फोटो दी हिंदू की खबर में प्रकाशित हुई थी।
 
 
 
 
इससे साफ होता है कि महाबलीपुरम तट पर पीएम नरेंद्र मोदी की सुरक्षा तथा शूटिंग में 20 करोड़ खर्च होने का दावा भ्रामक है। 
 

Tools Used

  • Twitter Advanced Search
  • Google keywords Search 
  • Yandex Image Search 
  • Google Reverse Image
 
Result- False
Yash Kshirsagar
After completing his post-graduation, Yash worked with some of the most renowned newspapers such as like Lokmat, Dainik Bhaskar & Navbharat for the past 6 years. To make sure that no incorrect news reaches people and to maintain peace and harmony in society, he chose to become a fact-checker.

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