सोमवार, अक्टूबर 25, 2021
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कलौंजी का शहद के साथ सेवन करने से नहीं होगा कोरोनावायरस (COVID-19)? पढ़ें यह फैक्ट चेक

Claim 

कलौंजी को शहद के साथ खाने से कोरोनावायरस से बचा जा सकता है क्योंकि इसमें 100% हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन होता है। हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन कोरोनावायरस को ठीक करता है। 

जानिए वायरल दावा क्या है

सोशल मीडिया पर अंग्रेजी भाषा के FOX NEWS नामक न्यूज़ चैनल की एक क्लिप शेयर कर दावा किया जा रहा है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन टेबलेट्स से कोरोनावायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है। जिसके आधार पर कहा जा रहा है कि कलौंजी का शहद के साथ सेवन करने से कोरोनावायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है क्योंकि इसमें हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन 100% मात्रा में मिलता है।

वीडियो क्लिप को यहाँ देखा जा सकता है :

Verification

Fox News की क्लिप में CDC (Centers for Disease Control) का हवाला देते हुए बताया गया है कि CDC ने एक लैब परीक्षण के दौरान पाया कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और क्लोरोक्विन में कोरोनावायरस को रोकने के लिए काफी क्षमता है। इसके साथ ही क्लिप के नीचे दिए गए एक स्क्रीनशॉट में कलौंजी के बीज और तेल को कोरोना वायरस का निवारक बताया गया है। इस वायरल क्लिप और कलौंजी से कोरोना से बचे रहने वाले दावों को Newschecker के एक पाठक ने  इसे whatsapp पर हमें भेज कर इसकी प्रमाणिकता जाँचने को कहा।  

वायरल हो रही न्यूज़ चैनल की क्लिप और कलौंजी से कोरोना को रोकने वाले दावे की सत्यता जानने के लिए हमने अपनी पड़ताल आरम्भ की। इस दौरान हमने सबसे पहले हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और क्लोरोक्विन का इस्तेमाल किस बीमारी के लिए किया जाता है, ये जानने की कोशिश की। इस दौरान हमें अमेरिका की medline.gov नामक एक आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में दवाइयों की जानकारी प्राप्त हुई। लेख के मुताबिक इन दवाओं का सेवन मलेरिया, लुपस, एरीथेमेटस और अर्थराइटिस के उपचार के लिए किया जा सकता है।     

वायरल न्यूज़ चैनल की क्लिप में बताया गया है कि CDC (Centers for Disease Control) ने एक लैब परीक्षण के दौरान पाया कि इन दवाओं का कोरोनावायरस के असर को कम करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। क्लिप में बताए जा रहे इस तथ्य का सच जानने के लिए हमने CDC की वेबसाइट को खंगाला। खोज के दौरान हमें CDC की वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की जानकारी प्राप्त हुई। लेख के मुताबिक इन दवाइयों को मलेरिया और उससे जुड़ी बीमारियों के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेख में आगे बताया गया है कि COVID-19 के इलाज में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और क्लोरोक्विन का प्रयोग किया जा सकता है या नहीं, इसकी जाँच अभी भी जारी है।

इसके साथ ही लेख में यह भी बताया गया है कि FDA ने इन दवाइयों को अस्पताल में कोरोना वायरस से पीड़ित बड़े और बच्चों के उपचार के लिए प्रयोग करने की मंजूरी दी है। विश्व स्वास्थ संगठन (WHO) के अनुसार WHO के पास इतना डाटा मौजूद नहीं है जिससे इन दवाइयों से कोरोना के ठीक होने या उससे बचने के दावे किये जा सके।  

इसके बाद क्लिप के साथ वायरल हो रहे कलौंजी के सेवन से कोरोनावायरस से बचे रहने वाले दावे की जाँच के लिए हमने पड़ताल की। सबसे पहले हमने कलौंजी से होने वाले फ़ायदों को गूगल पर सर्च किया। इस दौरान हमें लाइव हिंदुस्तान की वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में कलौंजी से होने वाले फ़ायदों की जानकारी प्राप्त हुई। लेख के मुताबिक इसे निम्लिखित रोगों में इस्तेमाल किया जा सकता है।  

  1. डायबिटीज
  2. हाई ब्लड प्रेसर
  3. मिर्गी
  4. गंजेपन में फायदेमंद 
  5. लकवा में लाभकारी
  6. सर्दी-जुकाम   
  7. खून की कमी  पीलिया  

इन फ़ायदों की सूची में सर्दी-जुकाम का भी जिक्र है। जो कि कोरोनावायरस के संक्रमण के लक्षणों में से एक है। कलौंजी में कौन-कौन से रसायानिक पदार्थ पाए जाते हैं यह जानने के लिए हमने एक बार फिर Google की मदद ली। इस दौरान हमें NCBI की वेबसाइट में कलौंजी मे पाए जाने वाले पदार्थों की सूची प्राप्त हुई।

कलौंजी में पाए जाने वाले पदार्थों में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन मौजूद नहीं है बल्कि इसमें थाइमोक्विनॉन (Thymoquinone) पाया जाता है। इसके बाद हमने थाइमोक्विनॉन और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के रासायनिक सूत्र जानने के लिए खोजा। खोज के दौरान हमें एक सरकारी वेबसाइट से दोनों पदार्थों के सूत्र प्राप्त हुए।   

थाइमोक्विनॉन ( Thymoquinone) :- C10H12O2

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) :- C18H26ClN3O

इस दौरान हमें दोनों ही पदार्थों के सूत्रों में कोई समानता प्राप्त नहीं हुई। जिसके मुताबिक दोनों ही पदार्थों के सेवन में अलग- अलग असर होगा ।

पड़ताल के दौरान कई टूल्स और कीवर्ड्स का उपयोग करते हुए तथ्यों का बारीकी से अध्ययन करने पर हमें पता चला कि कलौंजी में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन नामक कोई रासायनिक पदार्थ नहीं मिलता है। 

Tools Used

  • Google Search  

Result- False 

(किसी संदिग्ध ख़बर की पड़ताल, संशोधन या अन्य सुझावों के लिए हमें WhatsApp करें: 9999499044  या ई-मेल करें: checkthis@newschecker.in)

Nupendra Singh
A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encouraged Nupendra to work as a fact-checker. He believes one should always check the facts before sharing any information with others. He did his Masters in Journalism & Mass Communication from Lucknow University.

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