शुक्रवार, अक्टूबर 7, 2022
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वर्षों पहले किसी किताब में नहीं हुआ था COVID-19 के उपचार का जिक्र, भ्रामक दावा हुआ वायरल

Claim-
वर्षो पुरानी किताबों में छपा मिला कोरोना वायरस के इलाज का उपाय।
 
जानिए क्या वायरल दावा- 
दुनिया भर में दहशत मचाने वाले कोरोना वायरस ने अब तक 10 हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली है तो वहीं 2 लाख से ज्यादा लोग इसकी गिरफ़्त में आ चुके हैं। जहां एक तरफ विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस का कोई इलाज न मिलने पर इसे महामारी घोषित कर दिया है वहीं कुछ लोग सोशल मीडिया में कोरोना वायरस के इलाज का दावा कर रहे हैं। एक पुरानी किताब के एक पन्ने का स्क्रीनशॉट शेयर कर दावा किया गया है कोरोना वायरस का इलाज तो वर्षों पहले किताबों में दे दिया गया था।
Verification-
चीन के वुहान शहर से निकला कोरोना वायरस पूरे विश्व के सामने तीसरे विश्व युद्ध की स्थिति से भी बड़ी चुनौती खड़ा कर चुका है। जहां एक तरफ लोग इस भयानक संकट से जूझ रहे हैं वही दूसरी तरफ हमारे वैज्ञानिक इस संकट से बचने का ढूंढ रहे है। कोई इलाज ना होने के कारण इटली जैसे देश में भी स्थिति काफी गंभीर होती जा रही है। ट्विटर के एक यूजर ने एक पुरानी किताब के पन्ने का हवाला देते हुए दावा किया है कि वर्षों पहले लेखक-डॉ रमेश गुप्ता द्वारा प्रकाशित जन्तु विज्ञान की किताब में कोरोना वायरस के इलाज का जिक्र किया गया है।
इसके साथ ही व्हाट्सअप पर भी एक और किताब का स्क्रीनशॉट वायरल किया गया है। दावा किया जा रहा कि कोरोना वायरस का पूर्व में ही इलाज ढूंढ लिया गया था।
हमने दावे की सत्यता जानने के लिए सबसे पहले पन्ने के स्क्रीनशॉट का बारीकी से अध्ययन किया। इस दौरान हमने इमेज मैग्निफिएर की सहायता से जाना कि पन्ने के जिस हिस्से का हवाला देते हुए कोरोना वायरस के इलाज का दावा किया जा रहा उस भाग का शीर्षक “जुकाम (common cold ) ” दिया गया है।
स्क्रीनशॉट में दिए गए हिस्से को हमने पूरा पढ़ा जहां यह बताया जा रहा है कि जुकाम कई प्रकार के होते है जिसमें यह बताया जा रहा है कि 75% इसमें रहिनोवायरस होते हैं और शेष कोरोना वायरस होता है। आगे यह बताया गया है कि कैसे मौसम के परिवर्तन से तथा सर्दियों में जुकाम इंसान को संक्रमित कर देता है साथ ही अनुच्छेद में जुकाम से होने वाले लक्षणों का जिक्र किया गया है। अंत में इस संक्रमण से बचने का जिक्र किया गया है जहां यहाँ बताया जा रहा है कि एस्पिरिन,एन्टीहिस्टेमीन और नेजल स्प्रे से इसका उपचार संभव है।
इसके बाद हमने गूगल पर रहिनोवायरस और कोरोना वायरस की जानकारी प्राप्त करने के लिए खोजा। खोज के दौरान हमें गूगल पर NCBI (नेशनल सेंटर फॉर बियोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन) नामक वेबसाइट पर साल 2002 में प्रकाशित लेख प्राप्त हुआ जहां रहिनो वायरस और कोरोना वायरस का जिक्र किया गया था। लेख के अनुसार कोरोना वायरस कोई नया वायरस नहीं है। इसका जिक्र साल 2002 में भी किया जा चुका है। लेख के मुताबिक यह कोरोना वायरस OC43 और वायरस 229E जिसका जिक्र पूर्व में किया गया है।

Rhinovirus and coronavirus infection-associated hospitalizations among older adults.

J Infect Dis. 2002 May 1;185(9):1338-41. Epub 2002 Apr 16. Research Support, U.S. Gov’t, P.H.S.

इसके बाद हमने गूगल पर कोरोना वायरस के कितने प्रकार होते हैं इस तथ्य की जानकारी प्राप्त करने के लिए खोजा। इस दौरन हमें CDC नामक वेबसाइट से हमें जानकारी प्राप्त हुई। वेबसाइट के मुताबिक 7 प्रकार के कोरोना वायरस होते है।
  1. 229E (alpha coronavirus)
  2.  NL63 (alpha coronavirus)
  3. OC43 (beta coronavirus)
  4. HKU1 (beta coronavirus)
  5. MERS-CoV (the beta coronavirus that causes Middle East Respiratory Syndrome, or MERS)
  6.  SARS-CoV (the beta coronavirus that causes severe acute respiratory syndrome, or SARS)
  7. SARS-CoV-2 (the novel coronavirus that causes coronavirus disease 2019, or COVID-19)
लेख में यह बताया गया है कि आमतौर पर लोगों में 229E, NL63, OC43, और HKU1 जैसे कोरोना वायरस मौजूद रहते हैं जिनका इलाज संभव होता है। इन दिनों सबसे घातक वायरस COVD-19 है जिसका इलाज अभी तक संभव नहीं हो पाया है। इस कोरोना वायरस COVD-19 ने भारत में अब तक 300 से अधिक लोगों को संक्रमित किया है जिनमे बॉलीवुड की मशहूर गायिका कनिका कपूर भी शामिल हैं। अभी तक कोरोना वायरस COVD -19 के इलाज का कोई उपचार संभव नहीं है इस तथ्य की जानकारी के लिए हमने विश्व स्वास्थ संगठन की वेबसाइट को भी खंगाला जहां यह बताया गया है कि अभी तक कोरोना वायरस COVD -19 का कोई इलाज या उपचार संभव नहीं हो पाया है।
पड़ताल के दौरान कई टूल्स और कीवर्ड्स का उपयोग करते हुए तथ्यों का बारीकी से अध्ययन किया। इस दौरान यह पता चला कि कोरोना वायरस COVD -19 के इलाज का दावा करने वाला वायरल स्क्रीनशॉट पूर्व में फैले कोरोना वायरस 229E (alpha coronavirus) NL63 (alpha coronavirus) OC43 (beta coronavirus) HKU1 (beta coronavirus) के ऊपर आधारित है जिसका हाल के दिनों फैले COVD-19 वाले कोरोना वायरस से कोई संबंध नहीं है।
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Nupendra Singh
Nupendra Singh
A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encouraged Nupendra to work as a fact-checker. He believes one should always check the facts before sharing any information with others. He did his Masters in Journalism & Mass Communication from Lucknow University.
Nupendra Singh
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A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encouraged Nupendra to work as a fact-checker. He believes one should always check the facts before sharing any information with others. He did his Masters in Journalism & Mass Communication from Lucknow University.

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