बुधवार, अक्टूबर 27, 2021
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भूटान ने नहीं रोका असम के किसानों के लिए दिया जाने वाला पानी, सोशल मीडिया में वायरल हुआ भ्रामक दावा

Claim: भूटान ने इस साल असम के किसानों को दिया जाने वाला पानी रोक दिया है। 

जानिए क्या है वायरल दावा:

ट्विटर पर बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने South-Asian Monitor द्वारा प्रकाशित किया गया एक लेख ट्वीट किया है। इसके मुताबिक भूटान ने इस साल असम के किसानों को दिया जाने वाला पानी रोक दिया है। जिस वजह से किसान बहुत परेशान हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस घटना को नेपाल और चीन के साथ पहले से चल रहे विवाद से जोड़ा जा रहा है। बीजेपी सांसद द्वारा दावा किया गया है कि भूटान ने इस साल असम के किसानों को दिया जाने वाला पानी रोक दिया है। 

ट्वीट के आर्काइव वर्ज़न को यहां देखा जा सकता है।

Verification:

कुछ कीवर्ड्स की मदद से खंगालने पर हमने पाया कि वायरल दावे को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।

https://www.facebook.com/prabhasakshi/posts/1738062013007686
https://www.facebook.com/ahmadkamal.siddiqui/posts/3181193971941208

वायरल दावे की सत्यता जानने के लिए सबसे पहले हमने भूटान सरकार की तरफ से जारी किए गए हालिया बयानों को खोजना शुरू किया। पड़ताल के दौरान हमें Ministry of Foreign Affairs, Royal Government of Bhutan ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर पूरी घटना का एक स्पष्टीकरण दिया है। 

https://www.facebook.com/MoFABhutan/photos/pcb.1182264518786669/1182264025453385

भूटान विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण में बताया कि सामान्य परिस्थितियों में असम के किसान भूटान जाकर पानी डायवर्ट करते थे। महामारी के समय ऐसा करना संभव नहीं है क्योंकि सीमा पार आने वाले किसी भी व्यक्ति को 21 दिन क्वारेंटाइन में रहना होता है। इसके बाद भी पानी की सप्लाई जारी रखी गई थी। लेकिन भारी बारिश के कारण नहरों में पानी ठहर गया जिसकी वजह से सप्लाई रूक गई। भूटान और असम के लोगों के बीच अच्छे संबंध हैं। लोगों को भ्रमित करने के लिए इस तरह की खबरें फैलाई जा रही है। 

https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2020/06/26/fact1_1593182925.png

अधिक खोजने पर हमें Ministry of Foreign Affairs द्वारा जारी की गई प्रेस रिलीज मिली। जिसमें बताया गया है कि हाल ही में भारत में प्रकाशित की गई मीडिया रिपोर्ट पर मिनिस्ट्री द्वारा स्पष्टीकरण दिया गया है। यहां तक कि मंत्रालय ने तस्वीरें जारी की हैं कि स्थानीय प्रशासन किस तरह से सिंचाई चैनलों को साफ करने के लिए काम कर रहा है।

The Bhutanese ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भी कुछ तस्वीरों को ट्वीट कर बताया कि कैसे स्थानीय प्रशासन सिंचाई चैनलों को साफ करने के लिए काम कर रहे हैं। 

अधिक खोजने पर हमने जाना कि वायरल हो रही तस्वीर अभी की नहीं बल्कि 5 साल पुरानी है। इस तस्वीर को Ministry of Agriculture and Forests की आधिकारिक वेबसाइट से उठाया गया है। 

ट्विटर खंगालने पर हमें न्यूज़ एजेंसी ANI द्वारा किया गया एक ट्वीट मिला। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्णा ने कहा कि असम में सिंचाई का पानी भूटान की पहाड़ियों से आता है। कई बार बड़े पत्थरों की वजह से पानी का बहाव रूक जाता है। हमने भूटान से बात की और उसने तुरंत इसे ठीक कर दिया है। कोई विवाद भी नहीं है। 

कुछ कीवर्ड्स की मदद से गूगल खंगालने पर हमें दैनिक भास्कर द्वारा प्रकाशित की गई मीडिया रिपोर्ट मिली। इसके मुताबिक बारिश के कारण भूटान की कई नदियों में पानी का स्तर बढ़ गया है। इस वजह से बांधों की देखरेख सही ढंग से नहीं हो पा रही है। इस वजह से असम की ओर जाने वाली नहरों में कई जगह पानी ठहर गया है। 

कुछ मीडिया आउटलेट्स जैसे Times of India, News18 और South Asian Monitor ने भी लोगों को भ्रमित करने के लिए गलत खबर प्रकाशित की थी। 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे दावे का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा किया गया दावा पूरी तरह से गलत है। पड़ताल में हमने पाया कि भूटान से असम में सप्लाई होने वाला पानी बारिश की वजह से हुई तकनीकी खराबी की वजह से रुका है। लोगों को भ्रमित करने के लिए भ्रामक दावा शेयर किया जा रहा है। भूटान की तरफ से इस बात का खंडन किया गया है।  

Result: Misleading

Tools Used:

Google Keywords Search 

Facebook Search 

Twitter Search 

(किसी संदिग्ध ख़बर की पड़ताल, संशोधन या अन्य सुझावों के लिए हमें WhatsApp करें: 9999499044  या ई-मेल करें: checkthis@newschecker.in)

After working for India News and News World India, Neha decided to provide the public with the facts behind the forwards they are sharing. She keeps a close eye on social media and debunks fake claims/misinformations.

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