गुरूवार, सितम्बर 16, 2021
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यूपी के एक गन्ना किसान के बकाए को लेकर कांग्रेस नेत्री प्रियंका वाड्रा ने सोशल मीडिया पर शेयर किया भ्रामक दावा

सोशल मीडिया पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक ट्वीट कर यह दावा किया कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के एक किसान आलोक मिश्रा को 2020 में बेंची गई गन्ना फसल का भुगतान अभी तक नहीं मिला है.

भारत में कृषि एक ऐसा क्षेत्र है जहां मीडिया और समाज के प्रबुद्ध वर्ग का सबसे कम ध्यान जाता है. जब तक किसी किसान या किसी ग्रामीण क्षेत्र में कोई बड़ी घटना ना हो तब तक ये किसान और ग्रामीण क्षेत्र मुख्यधारा की मीडिया में अपना स्थान नहीं बन पाते. एक किसान को उसके गन्ने का भुगतान मिलना मुख्यधारा की मीडिया के लिए शायद इतनी बड़ी खबर नहीं है कि उस पर प्राइम टाइम की डिबेट की जाये। शायद यही कारण है कि तमाम राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के बीच किसानों की मूलभूत समस्याएँ दब जाती हैं। और फिर जब भुगतान में यही देरी किसान के साथ किसी अनहोनी का कारण बन जाती है तब मुख्यधारा की मीडिया उस अनहोनी को प्राइम टाइम की डिबेट का हिस्सा बनाकर मानवता के नए आयाम स्थापित करती है.

कुछ ऐसा ही लखीमपुर खीरी जिले के फत्तेपुर गांव निवासी आलोक मिश्रा के साथ हुआ. आलोक ने साल 2020 के मार्च-अप्रैल महीने में एक चीनी मिल के हाथों गन्ने की फसल बेची थी। लेकिन फसल का समय पर भुगतान ना होने की वजह से उन्हें कृषि तथा अन्य कार्यों को पूरा करने के लिए 3 लाख रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) लोन लेना पड़ा। जिस पर उन्हें ब्याज का भुगतान करना पड़ रहा है. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के मुताबिक़ आलोक मिश्रा को उनकी फसल का भुगतान आज तक नहीं मिल पाया है.

Fact Check/Verification

वायरल दावे की पड़ताल के लिए हमने सबसे पहले प्रियंका गांधी के ट्वीट के साथ शेयर किये लेख को पढ़ा. गाँव कनेक्शन द्वारा प्रकाशित इस लेख को ध्यान से पढ़ने के बाद हमें यह जानकारी मिली कि लखीमपुर खीरी के रहने वाले आलोक मिश्रा ने गाँव कनेक्शन के रिपोर्टर से बातचीत के दौरान यह बताया कि उनके फसल के भुगतान की बकाया राशि यानि 3 लाख रुपये उनको इसी वर्ष जनवरी में प्राप्त हुई है.

गाँव कनेक्शन द्वारा प्रकाशित उक्त लेख से प्राप्त जानकारी के अनुसार आलोक मिश्रा नामक उक्त किसान के बारे में जानकारी जुटाना शुरू किया। इस प्रक्रिया में हमें आलोक मिश्रा का फेसबुक प्रोफाइल प्राप्त हुआ। जहां एक पोस्ट में आलोक ने अपने एक मित्र अभिषेक शुक्ला के जन्मदिवस के अवसर पर उनको शुभकामना देते हुए उनका नंबर शेयर किया था. इस प्रकार हमें आलोक मिश्रा के मित्र अभिषेक शुक्ला का नंबर प्राप्त हुआ तथा हमसे बातचीत के दौरान अभिषेक ने हमारे साथ आलोक का नंबर भी शेयर किया.

बातचीत के दौरान आलोक ने बताया कि प्रियंका गांधी द्वारा उनके मामले को लेकर किया गया ट्वीट पूरी तरह गलत नहीं है बल्कि भ्रामक है. आलोक कहते हैं कि “हम प्रियंका जी द्वारा किये गए ट्वीट को सीधे तौर पर नकार नहीं सकते, क्योंकि पेमेंट जो है वो लेट मिलता है… लेकिन उन्होंने लिखा कि ‘बकाया है’ तो मेरा भुगतान ‘बकाया था’ ना कि अब भी ‘बकाया है’… तो यह ‘है’ और ‘था’ का अंतर है तो उन्होंने पढ़ा नहीं… उनकी गलती मानी जाएगी। क्योंकि उन्होंने पूरा पढ़ा नहीं, उनको पढ़ना चाहिए था.” हमारे द्वारा फसल की तौल और भुगतान राशि को लेकर पूछे गए सवाल पर आलोक आगे बताते हैं कि उन्हें फसल की तौल और भुगतान की राशि का सटीक ज्ञान तो नहीं है। लेकिन उन्हें इतना याद है साल 2020 के मार्च-अप्रैल महीने में उन्होंने 5 लाख 85 हजार 9 सौ कुछ रुपये (5,85,900) (आलोक को राशि का सटीक स्मरण नहीं है) अपनी फसल बेची थी। जिसका उनका आंशिक भुगतान मिलता रहा तथा इस वर्ष जनवरी माह में उन्हें पूरा भुगतान प्राप्त हुआ है.आलोक ने हमें यह भी बताया कि फसल की भुगतान राशि का सटीक ज्ञान ना होने की वजह से उन्होंने इसे लगभग 6 लाख रुपये बताया था.

Conclusion

इस तरह हमारी पड़ताल में यह बात साफ हो जाती है कि प्रियंका गांधी द्वारा उत्तर प्रदेश के लखीमपुरी खीरी के जिस किसान के गन्ने का भुगतान बकाया बताया गया था, दरअसल उक्त किसान को इसी वर्ष जनवरी माह में बकाया मिल चुका है. इस तरह प्रियंका गांधी द्वारा शेयर किया गया यह दावा हमारी पड़ताल में भ्रामक साबित होता है.

Result: Misleading

Sources:

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Saurabh Pandey
The reason why he chose to be a part of the Newschecker team lies somewhere between his passion and desire to surface the truth. The inception of social networking sites, misleading information, and tilted facts worry him. So, here he is ready to debunk any such fake story or rumor.

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