गुरूवार, अप्रैल 15, 2021
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कोरोना संक्रमण को देखते हुए रुसी राष्ट्रपति ने नहीं दिया लॉकडाउन का आदेश, फेक दावा वायरल

Claim- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने नागरिकों से कहां या तो 15 दिन के लिए अपने घर में रहो या फिर 5 साल के लिए जेल में रहो।
 
जानिए क्या है वायरल दावा 
दुनिया भर में अपने पैर पसारने वाले कोरोना वायरस ने भारत में भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है।  देखते-देखते अब तक भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में 300 से ज्यादा लोग चपेट में आ चुके है।  वायरस के रोकथाम के लिए भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को भारत के नागरिकों से ‘जनता कर्फ्यू’ की अपील की है। इसके साथ ही दिल्ली महाराष्ट्र पंजाब जैसे कई अन्य राज्यों ने अपने अपने प्रदेश को 31 मार्च तक बंद  रखने का ऐलान किया है। इस बंदी की खबर को मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुँचाया जा रहा है। इसी बीच सोशल मीडिया पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की एक तस्वीर के साथ एक स्क्रीनशॉट वायरल किया जा रहा है जहां यह दावा किया जा रहा कि राष्ट्रपति ने रूस के नागरिकों को आदेश दिया है कि या तो 15 दिन के अपने घर में रहो और या तो 5 साल के लिए जेल में रहो।
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भारत में कोरोना वायरस का दूसरा चरण चल रहा है इसके चलते 400 से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं तो  वहीँ 5 लोगों की संक्रमण से मौत भी हो चुकी है।  भारत में कोरोना का कहर रोकने के लिए देश के प्रधानमंत्री ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का ऐलान किया था जिसके बाद इस जनता कर्फ्यू की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से तमाम लोगों तक पहुंचाई जाने लगी। ट्विटर पर रूस के राष्ट्रपति की एक तस्वीर के साथ दावा शेयर किया जाने लगा कि व्लादिमीर पुतिन ने अपने नागरिकों को 15 दिन के लिए घर में रहने का आदेश दिया है अन्यथा उन्हें 5 साल के लिए जेल में रखा जायेगा।
वायरल दावे का सच जानने के लिए हमने अपनी पड़ताल शुरू की। पड़ताल के पहले चरण में हमने रूस में अब तक कोरोना वायरस के कितने मामले सामने आये हैं इस तथ्य की जानकारी प्राप्त की। खोज के दौरान हमें Moscow Times नामक वेबसाइट पर प्रकाशित लेख से संक्रमित लोगों की संख्या का पता चला। लेख के अनुसार अब तक रूस में 438 लोगों के संक्रमित होने की खबर है।
पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने इस तथ्य की जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया कि क्या रूस में सरकार ने बंद का ऐलान किया है? इस दौरान समाचार एजेंसी BBC की वेबसाइट पर प्रकाशित लेख से इस तथ्य की जानकारी प्राप्त हुई कि पुतिन सरकार ने अभी तक रूस में बंदी का ऐलान नहीं किया है। साथ ही पुतिन ने अपनी जनता को आश्वासन दिया है कि घबराने की जरूरत नहीं है स्थिति काबू में है।

No Russia lockdown as Putin puts on show of calm

Russia’s president had big plans for this spring, all about stressing stability and projecting strength. But that agenda has been hijacked by the spread of coronavirus and a dramatic plunge in both the oil price and rouble. April was earmarked for a vote to approve changes to the constitution, allowing Vladimir Putin to remain in power into his eighties.

इसके साथ ही वायरल स्क्रीनशॉट वाले पोस्ट की पुष्टि के लिए हमने ट्विटर पर रूसी सरकार के सभी आधिकारिक हैंडल्स को खंगाला। सबसे पहले हमें ‘Governement of Russia’का ट्विटर हैंडल प्राप्त हुआ। ट्विटर हैंडल के सबसे पहले ट्वीट में रूस के राष्ट्रपति की उनके परिषद सदस्यों के साथ एक तस्वीर प्रकाशित हुई थी जिसके उल्लेख में यह बताया गया था कि राष्ट्रपति अपने सदस्यों से आर्थिक व्यवस्था पर बात कर रहे हैं।
उक्त ट्वीट 22 मार्च को ट्वीट किया गया था। हमने हैंडल को पूरा खंगाला लेकिन हमें कहीं पर भी वायरल दावे से संबंधित कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई। इसके बाद हमने ‘President of russia ‘ नामक ट्विटर हैंडल को भी खंगाला लेकिन इस हैंडल में भी वायरल दावे से संबंधित कोई जानकारी प्रकाशित नहीं हुई है।
इसके साथ ही  ‘Government of Russia’  हैंडल को खंगालने पर 19 मार्च को ट्वीट किया गया एक पोस्ट प्राप्त हुआ जहां इस तथ्य की जानकारी दी गयी है कि 6 हजार डॉक्टर, 2 हज़ार श्वांस-रोग विशेषज्ञ और 18 हज़ार नर्सें रूस की जनता की सेवा के लिए और कोरोना वायरस से लड़ने के लिए तैयार हैं।
हमने पड़ताल के दौरान कई टूल्स और कीवर्ड्स का उपयोग करते हुए तथ्यों का बारीकी से अध्ययन किया लेकिन कहीं पर भी हमें रूस के राष्ट्रपति पुतिन का वायरल आदेश प्राप्त नहीं हुआ।
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Nupendra Singh
A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encouraged Nupendra to work as a fact-checker. He believes one should always check the facts before sharing any information with others. He did his Masters in Journalism & Mass Communication from Lucknow University.

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