बुधवार, अगस्त 10, 2022
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देवबंद में कांवड़ियों के ट्रक से हुई मुस्लिम व्यक्ति की मौत? पांच साल पुराने मामले को अभी का बताकर किया जा रहा है शेयर

सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए दावा किया जा रहा है कि आज (20 जुलाई) को यूपी के देवबंद में कांवड़ियों के ट्रक के आगे एक मुस्लिम ने कूदकर आत्महत्या कर ली. यूजर्स वीडियो के साथ लिख रहे हैं कि व्यक्ति ने ऐसा इसलिए किया जिससे कांवड़ियों को फंसाया जा सके कि उन्होंने एक मुस्लिम की जानबूझकर जान ले ली.

वायरल वीडियो में एक पुल के नीचे से ट्रकों को गुजरते देखा जा सकता है. इसी बीच सड़क पर एक व्यक्ति आता है और अचानक एक चलते ट्रक के पहियों के बीच कूद जाता है. ट्रक व्यक्ति के ऊपर से निकलते हुए आगे बढ़ जाता है. फेसबुक और ट्विटर पर वीडियो जमकर वायरल हो रहा है.

इस ट्वीट का आर्कइव यहां देखा जा सकता है.

देवबंद में कांवड़ियों के ट्रक
Courtesy: Facebook/Sani Singh

दरअसल, देश के अलग-अलग हिस्सों से कांवड़ यात्रा की शुरुआत हो चुकी है. कांवड़ यात्रा सावन के महीने का एक प्रमुख पर्व होता है. इस यात्रा में कांवड़िए(श्रद्धालु) अपने-अपने राज्यों से हरिद्वार, गोमुख, ऋषिकेश जैसे कुछ पवित्र स्थल पर गंगाजल लेने पहुंचते हैं. यहां से गंगाजल लेकर कांवड़िए अपने अपने क्षेत्रों वापस आते हैं और शिवरात्रि के दिन शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं. कांवड़ उस बर्तन या टोकरी को कहा जाता है जिसमें श्रद्धालु गंगा जल रखते हैं.‌

Fact Check/Verification

वायरल वीडियो के साथ किए गए दावे को कुछ कीवर्ड्स की मदद से खोजने पर हमें न्यूज़ वेबसाइट लाइव हिंदुस्तान की एक खबर मिली. खबर में वीडियो का एक स्क्रीनशॉट मौजूद है. खबर में वीडियो को यूपी के देवबंद का ही बताया गया है, जहां कांवड़ियों की गाड़ी के नीचे कूदकर वाहिद नाम के एक युवक ने आत्महत्या कर ली थी. लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि लाइव हिंदुस्तान की ये खबर 18 जुलाई 2017 की है, ना कि हाल-फिलहाल की.

देवबंद में कांवड़ियों के ट्रक
Courtesy: Live Hindustan

खबर में बताया गया है कि कावड़ियों के ट्रक से एक मुस्लिम युवक की मौत होने की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया था. लेकिन जब इसका वीडियो सामने आया तो पता चला की वाहिद खुद ही ट्रक के नीचे कूद गया ‌था. लाइव हिंदुस्तान की खबर के अनुसार, वाहिद के परिजनों ने घटना में बगैर कोई कानूनी कार्रवाई किए ही अंतिम संस्कार करने की बात कही थी.

इस मामले पर 19 जुलाई 2017 को नवोदय टाइम्स ने भी खबर प्रकाशित की थी. खबर में पुलिस के बयान के हवाले से लिखा है कि हो सकता है कि यह घटना आकस्मिक हो या फिर इसे धार्मिक हिंसा को बढ़ावा देने के लिए भी अंजाम दिया गया हो. इसलिए पुलिस दोनों पहलुओं से इस मामले की जांच कर रही थी.

वहीं, मामले को लेकर इंडिया टीवी ने लिखा था कि वाहिद के परिवार वाले गरीब थे. घटना के बाद कावड़ियों से भी पूछताछ हुई थी लेकिन कुछ देर बाद उन्हें छोड़ दिया गया था.

देवबंद टाउन यूपी के सहारनपुर जिले में आता है. सहारनपुर पुलिस ने वायरल वीडियो के साथ किए जा रहे दावे का ट्विटर पर खंडन किया है. पुलिस ने भी अपने ट्वीट में लिखा है कि यह प्रकरण 2017 का है, जिसे वर्तमान का बताकर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है. भ्रम फैलाने वालों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाएगी.

Conclusion

यहां हमारी जांच में स्पष्ट हो जाता है कि देवबंद की पांच साल पहले पुरानी घटना को ताजा मामला बताकर सांप्रदायिक पोस्ट शेयर किया जा रहा है.

Result: Partly False

Our Sources

Report of Live Hindustan, published on July 18, 2022
Reports of India TV and Navodaya Times, posted on July 19, 2022
Tweet of Saharanpur Police, posted on July 20, 2022

किसी संदिग्ध ख़बर की पड़ताल, संशोधन या अन्य सुझावों के लिए हमें WhatsApp करें: 9999499044  या ई-मेल करें: [email protected]

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Arjun Deodia
Arjun Deodia
An Electronics & Communication engineer by training, Arjun switched to journalism to follow his passion. After completing a diploma in Broadcast Journalism at the India Today Media Institute, he has been debunking mis/disinformation for over three years. His areas of interest are politics and social media. Before joining Newschecker, he was working with the India Today Fact Check team.
Arjun Deodia
Arjun Deodia
An Electronics & Communication engineer by training, Arjun switched to journalism to follow his passion. After completing a diploma in Broadcast Journalism at the India Today Media Institute, he has been debunking mis/disinformation for over three years. His areas of interest are politics and social media. Before joining Newschecker, he was working with the India Today Fact Check team.

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