बुधवार, अगस्त 4, 2021
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क्या ऑक्सीजन का विकल्प है नेब्युलाइजेशन? मोदी के ‘मन की बात’ सहित सोशल मीडिया के कई माध्यमों पर वायरल हुआ भ्रामक दावा

कोरोना के कारण इस समय पूरा देश एक असहज स्थिति से गुजर रहा है। अस्पताल, बेड से लेकर ऑक्सीजन तक की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में लोग एक दूसरी की मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक डॉक्टर का वीडियो काफी वायरल हो रहा है। जिसमें वो कहते हुए नजर आ रहे हैं कि ऑक्सीजन के पीछे मत भागिए, अपनी जान को खतरे में मत डालिए। मेरे बताए तरीके को अपनाएं और ऑक्सीजन टैंक की जगह नेब्युलाइज़र का इस्तेमाल करें। वो वीडियो में आगे बताते हैं कि नेब्युलाइज़र में मेडिसिन रेसप्टेकल में बिना दवाई डाले, उसका इस्तेमाल करें। 

‘मन की बात’ के 76 वें संस्करण में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने COVID महामारी पर चर्चा की और लोगों को चिकित्सा सहायता के लिए डॉक्टरों से परामर्श करने की सलाह भी दी। जिसका वीडियो पीएम मोदी के यूट्यूब चैनल पर मौजूद है। इस वीडियो में 0:28 मिनट पर, जब पीएम मोदी ने कहा कि कई डॉक्टर सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को सूचित करने, मदद करने की कोशिश कर रहे हैं और अपनी जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। इसी दौरान ये वायरल वीडियो चलता हुआ नजर आता है। जहां पर डॉक्टर ऑक्सीजन टैंक की जगह पर नेब्युलाइज़र का इस्तेमाल करने की सलाह दे रहा है।

Fact Check/Verification

वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए हमने वीडियो को ध्यान से देखा। इस दौरान हमें डॉक्टर की टी-शर्ट पर Sarvodaya Hospital का लोगो लगा हुआ नजर आया। जिसके बाद हमने गूगल पर कुछ कीवर्ड्स के जरिए सर्च किया। इस दौरान हमें Sarvodaya Hospital का एक ट्वीट मिला। जिसमें Sarvodaya Hospital ने अपने डॉक्टर द्वारा किए गए दावों का खंडन किया है।

Sarvodaya Hospital ने ट्वीट करते हुए लिखा है, ‘संस्थान वीडियो का समर्थन नहीं करता है। वीडियो में बताई गई बातें किसी भी साइंटिफिक स्टडी में साबित नहीं हुई हैं और न ही वैज्ञानिकों द्वारा दी गई ऐसी कोई मेडिकल सलाह मौजूद है। कृपया अपने डॉक्टर से बातचीत किए बिना इस वीडियो में बताई गई बातों को फॉलो न करें, इससे बीमारी बिगड़ सकती है।’

पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने नेब्युलाइज़र के बारे में सर्च करना शुरू किया। इस दौरान हमें यूएस की Centers for Disease Control and Prevention की एक रिपोर्ट मिली। जिसके अनुसार नेब्युलाइज़र एक ऐसी मशीन है जो तरल दवा (liquid medicine) को वायु के रूप में बदल देती है। ताकि उसे इनहेल करके कुछ ही मिनटों में फेफड़ों तक पहुंचाया जा सकते। अस्थमा जैसी बीमारी से ग्रसित मरीजों के लिए नेब्युलाइज़र का इस्तेमाल किया जाता है।

सर्च के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल दावे से जुड़े कई डॉक्टरों द्वारा किए गए ट्वीट मिले। Scotland’s National Health Service के डॉक्टर Aviral Vatsa ने ट्वीट करते हुए वायरल दावे को पूरी तरीके से गलत बताया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है, ‘कृपया इसे ऑक्सीजन का विकल्प बिलकुल न कहें। इससे कई जीवन खतरे में पड़ सकता है। यह नेब्युलाइज़र है जो दवाई को छोटे ड्रॉप्लेट्स में तब्दील करता है, ताकि उसे फेफड़ों की गहराई तक पहुंचाया जा सके। इसके साथ ऑक्सीजन सिलेंडर कई बार लगाना पड़ता है।’ Medanta Hospital के डॉक्टर Arvinder Singh Soin ने भी ट्वीट कर इस दावे को पूरी तरीके से गलत बताया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है कि ये वीडियो बेसलेस है।

पड़ताल के दौरान पता चला कि वायरल वीडियो में दिख रहे शख्स का नाम डॉ आलोक है। खोज के दौरान ट्विटर पर डॉ आलोक का वायरल दावे से जुड़ा एक वीडियो मिला। जिसमें वो कहते हुए नजर आ रहे हैं कि ऑक्सीजन सिलेंडर की जगह पर नेब्युलाइज़र का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। “ये गलत है, सही विकल्प नहीं है। मैं कुछ और कहना चाह रहा था, लेकिन सही शब्दों का इस्तेमाल नहीं किए जाने के चलते लोगों में गलत मैसेज चला गया। मैं इसके लिए माफी मांगता हूं।”

Conclusion

हमारी पड़ताल में मिले तथ्यों के मुताबिक वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा पूरी तरीके से गलत है। नेब्युलाइज़र को ऑक्सीजन के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। नेब्युलाइज़र को आस्थमा जैसे मरीजों के लिए मिनटों में फेफड़ों तक दवाई पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

Result: False

Claim Review: ऑक्सीजन टैंक की जगह नेब्युलाइज़र का इस्तेमाल किया जा सकता है।
Claimed By: मन की बात
Fact Check: False

Our Sources

Twitter –https://twitter.com/Htee48738577/status/1385919499258327041

 Twitter –https://twitter.com/Sarvodaya_Care/status/1385598098848706568

Twitter –https://twitter.com/ArvinderSoin/status/1385936050388799490

Twitter –https://twitter.com/DocVatsa/status/1385895070147153920

 USA Website -ftp://ftp.cdc.gov/pub/Health_Statistics/NCHS/Survey_Questionnaires/NHIS/2018/english/qchild.pdf

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Pragya Shukla
Pragya has completed her Masters in Mass Communication, and has been doing content writing for the last four years. Due to bias and incomplete facts in mainstream media, she decided to become a fact-checker.

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