गुरूवार, दिसम्बर 1, 2022
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गुवाहाटी के जंगलों में अवैध बसावट पर की गई वर्षों पुरानी पुलिसिया कार्रवाई को NRC के संदर्भ में किया गया शेयर

Claim-हमारे देश के बाक़ी हिस्सों का जो हस्र हो रहा है, ठीक उसी तरह असम में यह चल रहा है देखिए, किस तरह NRC में अपना नाम नहीं होने पर घर से भारतीय नागरिकों को उठाया जा रहा है। आज आप इस विरोध में भाजपा की मोदी सरकार के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ नहीं उठाओगे तो आने वाले वक़्त में यही हाल अपना होगा
Verification-
देश में CAA और NRC पारित होने के बाद देश के कोने-कोने से इसका विरोध सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक हो रहा है। इन्हीं सब के बीच सोशल मीडिया पर एक  वीडियो वायरल हो रहा है जहां कुछ पुलिस कर्मियों को एक परिवार पर बर्बरता करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो शेयर करने वाले यूज़र का दावा है कि असम में एक परिवार के लोगों का NRC की सूची में नाम ना होने के कारण इलाके की पुलिस उन्हें देश से जबरन बाहर कर रही है।
वीडियो देखने पर हमें इसके पुरान होने का अंदेशा हुआ। जहां से हमने अपनी पड़ताल आरम्भ की। वीडियो को देखने पर हमें उस पर लाल रंग से कुछ अक्षर लिखे हुए नजर आये। गौर से देखने पर DY 365 लिखा हुआ साफ़ नजर आया।
जिसे गूगल में कुछ कीवर्ड्स के माध्यम से खोजने पर फेसबुक में 2 वर्ष पहले अपलोड हुए एक वीडियो का लिंक प्राप्त हुआ।
वीडियो के शीर्षक में As the second day of eviction drive continues at Amchang Wildlife Sanctuary, an appalling incident took place at Kangkan Nagar.लिखा हुआ था। गूगल पर इन्हीं शब्दों का इस्तेमाल कीवर्ड्स के रूप में करने पर हमें nov.28 2017 को अपलोड हुआ एक वीडियो प्राप्त हुआ।
वीडियो के विवरण में बताया गया था की असम सरकार ने गुवाहाटी के जंगलों में स्थित अमचांग वन्यजीव अभ्यारण्य  में स्थापित सभी बस्तियों को हटाने का अभियान चलाया था।
इसके बाद  Assam Tribune  व The Hindu की वेबसाइट पर साल 2017 को प्रकाशित लेख प्राप्त हुए जहां इस पूरे मामले की जानकारी प्रकाशित हुई है।
इस सभी सभी तथ्यों को परखने पर पता चला कि वायरल वीडियो साल 2017 की है, जिसे इन दिनों लोगों को भ्रमित करने के लिए सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है।
Tools Used 
Google Search
Youtube Search
Result-Misleading
 (किसी संदिग्ध ख़बर की पड़ताल, संशोधन या अन्य सुझावों के लिए हमें ई-मेल करें: [email protected]
Nupendra Singh
Nupendra Singh
A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encouraged Nupendra to work as a fact-checker. He believes one should always check the facts before sharing any information with others. He did his Masters in Journalism & Mass Communication from Lucknow University.
Nupendra Singh
Nupendra Singh
A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encouraged Nupendra to work as a fact-checker. He believes one should always check the facts before sharing any information with others. He did his Masters in Journalism & Mass Communication from Lucknow University.

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