शनिवार, दिसम्बर 10, 2022
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भारत बंद के दौरान इकट्ठा हुई भीड़ के वीडियो को संत रविदास मंदिर तोड़े जाने पर जुटी भीड़ बताया गया

Claim

दिल्ली के तुगलकाबाद में स्थित संत रविदास महाराज के  600 साल पुराने गुरुस्थल (मंदिर) को तोड़े जाने के विरुद्ध दिल्ली में लाखों की तादाद में संत रविदास के अनुयायी एकत्रित हुए।

Verification

सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में हजारों लोग मार्च निकालते दिख रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि तुगलकाबाद में संत रविदास का मंदिर तोड़े जाने के विरोध में दिल्ली में उनके चाहने वालों के द्वारा यह मार्च निकाला गया है। हमनें इस बारे में पड़ताल शुरू की तो ट्विटर पर यही दावा करने वाला एक ट्वीट मिला।

इस ट्वीट में बताया गया है कि दिल्ली में दलितों द्वारा सबसे बड़ा प्रदर्शन किया गया। हमनें दिल्ली में दलितों के प्रदर्शन से सम्बंधित कुछ कीवर्ड्स की मदद से गूगल खंगाला तो कई रिजल्ट सामने आए।

गूगल में खोज जारी रखने पर हमें यूट्यूब पर वायरल हो रहा एक वीडियो प्राप्त हुआ। 

वीडियो के डिस्क्रिप्शन में लिखा है कि गुरु संत रविदास जी महाराज के तुगलकाबाद दिल्ली स्थित 600 साल पुराने गुरुस्थल (मंदिर) को सरकार की मंशा द्वारा तोड़े जाने के विरुद्ध आज दिल्ली के रामलीला मैदान में अतिविशाल धरना प्रदर्शन। केंद्र सरकार की जातिवादी सोच के खिलाफ आज दिल्ली में लाखों की तादाद में संत रविदास जी महाराज के अनुयायी एकत्रित हुए एवं पुनः मंदिर बनाने की मांग को पुरजोर उठाया।

लेकिन हमारी पड़ताल यही खत्म नहीं हुई। वीडियो की सटीक जानकारी पाने के लिए कुछ स्क्रीनशाॅट्स लिए और गूगल की मदद से ढूंढा तो हमें यूट्यूब पर वही वीडियो मिला जिसे दिल्ली का बताया जा रहा था। यह वीडियो पिछले साल 2 अप्रैल को अपलोड किया गया है। वीडियो के कैप्शन में लिखा है कि SC-ST कानून में बदलाव के विरोध में दलित लोगों ने भारत बंद का एलान किया था। इस दौरान ये मार्च निकाला गया। 

यही दावा करने वाला एक और वीडियो यूट्यूब पर मिला। 

हमारी पड़ताल में यह साबित हो गया कि सोशल मीडिया में जो वीडियो वायरल हो रहा है वह एक साल पुराना है। तुगलकाबाद में संत रविदास का मंदिर तोड़े जाने के विरोध में निकाले गए मार्च का इस वीडियो से कोई वास्ता नहीं है।  

Tools Used

  • Google Keywords Search
  • Twitter Advanced Search
  • Yandex 

Result- False

Yash Kshirsagar
Yash Kshirsagar
After completing his post-graduation, Yash worked with some of the most renowned newspapers such as like Lokmat, Dainik Bhaskar & Navbharat for the past 6 years. To make sure that no incorrect news reaches people and to maintain peace and harmony in society, he chose to become a fact-checker.
Yash Kshirsagar
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After completing his post-graduation, Yash worked with some of the most renowned newspapers such as like Lokmat, Dainik Bhaskar & Navbharat for the past 6 years. To make sure that no incorrect news reaches people and to maintain peace and harmony in society, he chose to become a fact-checker.

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