शनिवार, दिसम्बर 10, 2022
शनिवार, दिसम्बर 10, 2022

होमहिंदीCAA के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन में हुआ 'स्वास्तिक' का अपमान?

CAA के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन में हुआ ‘स्वास्तिक’ का अपमान?

Claim

हम देखेंगे तो यह शाहीन बाग वाले CAA के Protest के नाम में दरअसल यही देखना चाहते हैं… हिंदुओं के पवित्र चिन्हों की “बर्बादी”, “पवित्र स्वस्तिक” की बर्बादी? जेएनयू में एक बार थे चिल्लाए थे भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी-जंग रहेगी। जागो इससे पहले कि देर हो जाए। 

Verification

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (NRC) पर लोगों को एकमत करने के लिए केंद्र सरकार, संघ और बीजेपी लगातार प्रयास कर रही है तो कई राज्यों में इसके खिलाफ और समर्थन में प्रदर्शन भी लगातार हो रहे हैं। वहीं इस कानून से जुड़ी कई फेक खबरें और अफवाहें सोशल मीडिया पर लगातार साझा की जा रही हैं। बीजेपी नेता संबित पात्रा ने भी ऐसा ही कुछ ट्विटर पर पोस्ट किया है। विरोध प्रदर्शन का एक पोस्टर शेयर कर संबित पात्रा ने लिखा है कि हम देखेंगे तो यह शाहीन बाग वाले CAA के Protest के नाम में दरअसल यही देखना चाहते हैं… हिंदुओं के पवित्र चिन्हों की “बर्बादी”, “पवित्र स्वस्तिक” की बर्बादी? जेएनयू में एक बार थे चिल्लाए थे भारती की बर्बादी तक जंग रहेगी-जंग रहेगी। जागो इससे पहले कि देर हो जाए। 

ट्विटर पर संबित पात्रा के ट्वीट को 10,000 लोगों द्वारा शेयर किया जा चुका है और 2730 यूजर्स ने वायरल तस्वीर को लाइक किया है।

फेसबुक पर इस दावे को कई लोगों ने शेयर किया है जिसे यहां देखा जा सकता है। 

वहीं ट्विटर पर इस दावे को शेयर करने वालों की भी तादाद बहुत ज्यादा है। जिनमें से कुछ आप नीचे देख सकते हैं। 

कुछ टूल्स और कीवर्ड्स की मदद से हमने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे पोस्टर को खंगाला। पड़ताल के दौरान हमें You Tube पर हमें Republic World  का एक वीडियो मिला जो कि 16 जनवरी, 2020 को अपलोड किया गया था। यह वीडियो भी वायरल पोस्टर से संबंधित है जिसमें दावा किया जा रहा है कि शाहीन बाग में प्रदर्शकारियों द्वारा हिंदू प्रतीक के चिन्ह का दुरुपयोग किया गया था। 

अब बात करते हैं नाज़ी चिन्ह और हिंदू चिन्ह की, दरअसल अगर नाज़ी चिन्ह और हिंदू चिन्ह की तस्वीरों का मिलान किया जाए तो फर्क देखा जा सकता है। स्वास्तिक लाल रंग का होता है जिसमें चार बिंदी होती है जबकि नाज़ी चिन्ह में यह चार बिंदी नहीं होती और वह काले रंग का होता है। नाज़ी चिन्ह टेढ़ा होता है जबकि स्वास्तिक सीधा बनाया जाता है। दरअसल, यहुदियों का नरसंहार करने वाले तानाशाह हिटलर की पार्टी का नाम नाज़ी (NAZI) था और उनका चिन्ह स्वास्तिक से मेल खाता था। 

नीचे तस्वीरों में देखा जा सकता है कि नाज़ी चिन्ह का इस्तेमाल तानाशाही को दर्शाने के लिए भी किया जाता है। दुनियाभर में इसी चिन्ह का इस्तेमाल प्रदर्शनों में कई बार देखा गया है।

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि एक शख्स अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का विरोध करने के लिए नाज़ी झंडा फहरा रहा है

हमारी पड़ताल में हमने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्टर के साथ किए जा रहे दावे को गलत पाया है। दरअसल वायरल पोस्टर में नाज़ी चिन्ह को इस्तेमाल कर नागरिकता संशोधन कानून का विरोध किया जा रहा है। जबकि लोगों को भ्रमित करने के लिए नाज़ी चिन्ह को स्वास्तिक का दुरुपयोग बताकर शेयर किया जा रहा है। 

Tools Used

  • Google Keywords Search
  • Reverse Image Search 
  • YouTube Search 

Result: False

(किसी संदिग्ध ख़बर की पड़ताल, संशोधन या अन्य सुझावों के लिए हमें WhatsApp करें: 9999499044 या ई-मेल करें: [email protected])

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Most Popular