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Fact Check: क्या श्रद्धालुओं के जूतों की देखभाल करने वाली यशोदा ने राम मंदिर को दिया 51 लाख रुपये का दान? वायरल दावे का यहां जानें सच

Authors

Since 2011, JP has been a media professional working as a reporter, editor, researcher and mass presenter. His mission to save society from the ill effects of disinformation led him to become a fact-checker. He has an MA in Political Science and Mass Communication.

Claim
वृन्दावन की गलियों में श्रद्धालुओं के जूतों की देखभाल करने वाली यशोदा ने राम मंदिर को 51 लाख रुपये समर्पित किए हैं।
Fact
यह दावा फ़र्ज़ी है। तस्वीर में दिख रही महिला ने 2017 में अपना घर बेचकर मिले पैसों से वृन्दावन में गौशाला बनाने के लिए दान दिया था।

आज, 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में होने वाले राम मंदिर के उद्घाटन से जोड़कर एक और दावा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पीले वस्त्र में बैठी एक महिला की फोटो के साथ ये दावा वायरल हो रहा है कि वृन्दावन की गलियों में श्रद्धालुओं के जूतों की देखभाल करने वाली यशोदा ने राम मंदिर को 51 लाख रुपये समर्पित किए हैं।

फेसबुक पर एक तस्वीर के साथ यह दावा वायरल है कि 20 वर्ष की उम्र में यशोदा जी को उनके पति धराधाम छोड़ गये थे तब से उन्होंने अपना जीवन बाँके बिहारी लाल को समर्पित कर दिया। वे वृंदावन की गलियों में दर्शन को आये भक्तों के जूतों की सुरक्षा करने लगीं। जिससे 30 वर्षों में 51 लाख रुपये जमा हो गये। पोस्ट के अनुसार, जब उन्हें राम मंदिर निर्माण की सूचना मिली तो उन्होंने राम के मंदिर को 51,10,025/- रुपये समर्पित कर दिए। वायरल फेसबुक पोस्ट्स को यहाँ और यहाँ देखा जा सकता है।

Courtesy: fb/Om G Jaiswal
Courtesy: fb/Keshav Sharma Hjm

ब्रेकिंग डॉट कॉम (उत्तराखंड) नामक वेबसाइट ने भी 21 जनवरी 2024 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया है कि वृन्दावन की गलियों में श्रद्धालुओं के जूतों की देखभाल करने वाली यशोदा नामक महिला ने राम मंदिर को 51 लाख रुपये समर्पित किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, महिला ने कहा है कि उनकी साधना सफल हुई है। इस रिपोर्ट का आर्काइव यहाँ देख सकते हैं।

Courtesy : https://www.breakinguttarakhand.com/

एक्स पर वायरल हो रहे ऐसे कई पोस्ट्स का आर्काइव यहाँ, यहां और यहाँ देखा जा सकता है।

Courtesy: Whatsapp User

यह दावा हमें WhatsApp Tip Line (9999499044) पर भी प्राप्त हुआ है।

Fact Check/Verification

पड़ताल की शुरुआत में हमने सबसे पहले तस्वीर को रिवर्स इमेज सर्च किया। हमें इस तस्वीर के साथ साल 2017 में फेसबुक पर शेयर किए गए कुछ पोस्ट्स प्राप्त हुए।

Courtesy : Google

9 लाख फॉलोवर्स वाले ‘Shri Banke Bihari Ji Vrindavan’ नामक फेसबुक पेज द्वारा 22 मई 2017 को साझा किये गए पोस्ट में बताया गया है कि तस्वीर में दिख रही महिला का नाम यशोदा है जो जूते-चप्पलों की रखवाली करती हैं। वे 20 वर्ष की आयु में विधवा हो गई थीं। इन्होने पिछले 30 वर्षों में 51,02,550 पैसे इकट्ठा करके, 40 लाख रुपये की रकम से एक गौशाला व धर्मशाला का निर्माण शुरू कर दिया है।

जांच को आगे बढ़ाते हुए हमने सम्बंधित कीवर्ड्स को गूगल सर्च किया, जिससे हमें 26 मई 2017 को टाइम्स ऑफ़ इंडिया द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 70 साल की विधवा ने दशकों की बचत और अपनी संपत्ति बेचने से जो 40 लाख रुपये इक्कट्ठा हुए, उन्हें वृन्दावन में एक गौशाला और एक धर्मशाला बनाने के लिए दान कर दिया।

पड़ताल में आगे हमें 23 जून 2017 को ABP न्यूज़ द्वारा जूतों की रखवाली कर 40 लाख रुपए से गोशाला बनवाने के वायरल दावे की जांच पर की गयी रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में दिखाया गया है कि ABP संवाददाता ने वृन्दावन की इस महिला से इन सब दावों पर बात की है। महिला बताती हैं कि वे कटनी जबलपुर की रहने वाली हैं और पति के देहांत के बाद वृन्दावन आ गयीं। वे बताती हैं कि गौशाला बनाने के लिए उन्होंने 15 लाख रूपए दिए थे। ये पैसे उन्हें जूतों की रखवाली से नहीं, बल्कि कटनी में अपना घर बेचने पर मिले थे।

Conclusion

अपनी जांच से हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि वायरल हो रहा दावा फ़र्ज़ी है। पड़ताल में हमने पाया कि यशोदा नामक महिला की यह तस्वीर 2017 की है। तस्वीर में दिख रही महिला मंदिर के बाहर जूते चप्पलों की रखवाली तो करती हैं, पर 2017 में उन्होंने मध्यप्रदेश स्थित कटनी में अपना घर बेचकर मिले पैसों से वृन्दावन में गौशाला बनाने के लिए दान दिया था।

Result: False

Our Sources
Report published by Times of India on 26th May 2017.
Report published by ABP News on 23rd June 2017.

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Since 2011, JP has been a media professional working as a reporter, editor, researcher and mass presenter. His mission to save society from the ill effects of disinformation led him to become a fact-checker. He has an MA in Political Science and Mass Communication.

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