इफ्तार पार्टी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर इस दावे से शेयर किया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के जादवपुर यूनिवर्सिटी में सरस्वती पूजा पर पाबंदी लगा दी गई थी, लेकिन वहां इफ्तार पार्टी चल रही है.
हालांकि, हमने अपनी जांच में पाया कि वायरल दावा फर्जी है. जादवपुर यूनिवर्सिटी में सरस्वती पूजा और इफ्तार पार्टी दोनों ही विद्यार्थियों के द्वारा कई सालों से मनाई जाती रही है. इस साल भी ये दोनों त्यौहार मनाए गए थे.
वायरल वीडियो 24 सेकेंड का है, जिसमें इस्लामी टोपी पहना हुआ एक युवक माइक से अजान देता हुआ नजर आ रहा है और वहां मौजूद कई लोग इफ्तार करते हुए नजर आ रहे हैं.
वीडियो को वायरल दावे वाले कैप्शन के साथ X पर शेयर किया गया है, जिसमें लिखा हुआ है “ये वही बंगाल का जादवपुर यूनिवर्सिटी है जहाँ सरस्वती पूजा मनाने की पांबदी लगा दी गई थी. आज वहाँ इफ़्तार पार्टी चल रही है. बंगाल में इस्लामिक शासन की पूरी तैयारी चल रही है”.

इसी तरह के कैप्शन के साथ इस वीडियो को फेसबुक पर भी शेयर किया गया है.

Fact Check/Verification
जादवपुर यूनिवर्सिटी में सरस्वती पूजा पर पाबंदी और इफ्तार पार्टी के आयोजन के दावे से वायरल हो रहे वीडियो की जांच में संबंधित कीवर्ड की मदद से फेसबुक सर्च करने पर, हमें इस कार्यक्रम की कई तस्वीरें और वीडियोज मिले. ये तस्वीरें और वीडियोज 24 मार्च को फेसबुक पर अपलोड की गई थीं. वायरल वीडियो वाले दृश्य इन तस्वीरों और वीडियोज में मौजूद दृश्य से मेल खा रहे थे.

तस्वीरों और वीडियोज के साथ मौजूद कैप्शन में बताया गया था कि जादवपुर यूनिवर्सिटी में एक सेमिनार के साथ ही इफ्तार पार्टी का कार्यक्रम आयोजित किया गया था.
खोजने पर हमें एक तस्वीर में सेमिनार-कम-इफ्तार मजलिस के कार्यक्रम से जुड़ा एक पोस्टर मिला. जिसमें बताया गया था कि जादवपुर यूनिवर्सिटी के इफ्तार ऑर्गेनाइजिंग कमिटी ने 24 मार्च को यूनिवर्सिटी के डॉ के पी बसु मेमोरियल हॉल में पहले सेमिनार का आयोजन किया और उसके बाद ओपन एयर थिएटर में इफ्तार का आयोजन किया था.

इसके बाद हमने इफ्तार ऑर्गेनाइजिंग कमिटी के एक सदस्य से संपर्क किया. उन्होंने बताया कि “वायरल वीडियो 24 मार्च को ओपन एयर थिएटर में हुए इफ्तार पार्टी का ही है. लेकिन यह इफ्तार पार्टी पूरी तरह से यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों द्वारा आयोजित की गई थी और इसमें यूनिवर्सिटी प्रशासन की कोई भागीदारी नहीं थी”. साथ ही उन्होंने सरस्वती पूजा पर पाबंदी के दावे का खंडन करते हुए कहा कि हर साल यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों द्वारा हॉस्टल और अलग-अलग जगहों पर सरस्वती पूजा और होली जैसे त्यौहार मनाए जाते हैं, इसमें सभी विद्यार्थी हिस्सा लेते हैं”.
हमारी अभी तक की जांच से यह तो साफ़ हो गया था कि वायरल वीडियो जादवपुर यूनिवर्सिटी का ही और यह इफ्तार पार्टी विद्यार्थियों द्वारा आयोजित की गई थी.
इसके बाद हमने सरस्वती पूजा पर पाबंदी वाले दावे की पड़ताल की तो हमें फेसबुक पर ही कीवर्ड सर्च में कई सारी तस्वीरें मिली, जिससे यह स्पष्ट था कि यूनिवर्सिटी में छात्रों ने इस साल भी सरस्वती पूजा मनाई थी.
इतना ही नहीं, छात्र संगठन एबीवीपी ने भी इसी साल 2 फ़रवरी को यूनिवर्सिटी कैम्पस में ही सरस्वती पूजा का आयोजन किया था और इसकी तस्वीरें भी फेसबुक पर शेयर की थी. जिन्हें आप नीचे देख सकते हैं.

हमने अपनी जांच में एबीवीपी के जादवपुर यूनिवर्सिटी ईकाई के अध्यक्ष निखिल दास से भी संपर्क किया. उन्होंने बताया कि “पिछले दो वर्षों से एबीवीपी त्रिगुण सेन ऑडिटोरियम के सामने यूनिवर्सिटी परिसर में सरस्वती पूजा का आयोजन कर रही है. परिसर में डोल उत्सव भी आयोजित किया जाता है. लेकिन जब हम ये सब कार्यक्रम करने जाते हैं तो हमारे झंडे, पोस्टर फाड़ दिए जाते हैं”. उन्होंने इसके लिए वामपंथी छात्र संगठनों को दोषी ठहराया.
हमने अपनी जांच में अधिक जानकारी के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से भी संपर्क करने की कोशिश की है. उनका जवाब आने पर स्टोरी को अपडेट कर दिया जाएगा.
Conclusion
हमारी जांच में मिले साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि जादवपुर यूनिवर्सिटी में सरस्वती पूजा पर पाबंदी का वायरल दावा फर्जी है.
(हमारे सहयोगी तनुजीत दास के इनपुट्स के साथ)
Our Sources
Image posted by a Facebook account on 24th March 2025
Telephonic Conversation with JU IFTAR Organising Committee
Image Posted by JU ABVP Facebook account on 2nd Feb 2025
Telephonic Conversation with JU ABVP President Nikhil Das
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