Fact Check
फैक्ट चेक: कश्मीर में 2014 से पहले सेना के जवानों के साथ बदसलूकी का बताकर वायरल हुआ यह वीडियो 2017 का है
Claim
कश्मीर में 2014 से पहले सेना के जवानों के साथ होती बदसलूकी का वीडियो.
Fact
नहीं, यह वीडियो 2017 का है.
सोशल मीडिया पर जवानों से बदसलूकी का एक वीडियो इस दावे से शेयर किया जा रहा है कि यह वीडियो कश्मीर में 2014 से पहले सेना के जवानों की स्थिति का है. यह वीडियो अप्रत्यक्ष रूप से पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए शेयर किया जा रहा है.
हालांकि, हमने अपनी जांच में पाया कि साल 2017 का यह वीडियो श्रीनगर संसदीय सीट पर उपचुनाव के दौरान बडगाम इलाके का है. उस दौरान राज्य में पीडीपी-भाजपा के नेतृत्व में सरकार चल रही थी. वहीं केंद्र में भाजपा की सरकार थी.
वायरल वीडियो 2 मिनट 22 सेकेंड का है, जिसमें भीड़ कई सुरक्षाकर्मियों के साथ बदसलूकी और उनके साथ मारपीट करती हुई नजर आ रही है. इस दौरान भीड़ भारत के विरोध में नारे में लगाती हुई भी सुनाई दे रही है.
वीडियो को X पर वायरल दावे वाले कैप्शन के साथ शेयर किया गया है, जिसमें लिखा हुआ है “2014 के पहले ये हालात थे हमारी सेना के, शर्म आनी चाहिए चमचों को. क्या हालत कर दी थी वोट की राजनीति ने सेना की”.

Fact Check/Verification
कश्मीर में 2014 से पहले सेना के जवानों की स्थिति का बताकर वायरल हो रहे इस वीडियो की पड़ताल के दौरान, हमें यह वीडियो फिल्म अभिनेता रणदीप हुड्डा के X अकाउंट पर मिला, जिसे 13 अप्रैल 2017 को पोस्ट किया गया था.

इसके बाद संबंधित कीवर्ड की मदद से गूगल सर्च किया तो हमें हिंदुस्तान टाइम्स की वेबसाइट पर 14 अप्रैल 2017 को प्रकाशित रिपोर्ट में यह वीडियो मिला.

रिपोर्ट में बताया गया था कि यह घटना 9 अप्रैल 2017 को मध्य कश्मीर के बडगाम ज़िले के चादूरा विधानसभा क्षेत्र के क्रालपोरा इलाके में मतदान ड्यूटी पर जा रहे सीआरपीएफ जवानों के साथ हुई थी. जिसके बाद सीआरपीएफ की शिकायत पर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक मामला दर्ज किया था.
वहीं, रिपोर्ट में सीआरपीएफ के तत्कालीन इंस्पेक्टर जनरल रविदीप सिंह शाही का बयान भी मौजूद था, जिसमें उन्होंने कहा था कि “जांच के दौरान हमने पाया कि वीडियो असली है. हमने सभी तथ्यों को एकत्र किया है और आधिकारिक रूप से चादूरा पुलिस स्टेशन को सूचित किया है. जिन्होंने हमारे जवानों के साथ ऐसा किया है उनके खिलाफ हम कानूनी कार्रवाई करेंगे. हम इस मामले को सख्ती से आगे बढ़ाएंगे”.
इसके अलावा हमें इस संबंध में इंडियन एक्सप्रेस की वेबसाइट पर भी प्रकाशित रिपोर्ट मिली. रिपोर्ट में बताया गया था कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 14 अप्रैल 2017 को इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया था और वीडियो में नज़र आ रहे अन्य लोगों की तलाश भी की जा रही थी. वीडियो में कश्मीरी युवकों को सीआरपीएफ जवानों से गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट करते हुए देखा गया था, जब जवान चुनाव ड्यूटी पूरी कर ईवीएम मशीनें लेकर लौट रहे थे. इस दौरान जवानों ने बेहद संयम दिखाया था.

इसके अलावा, हमें इस संबंध में इंडिया टुडे की वेबसाइट पर 19 अप्रैल 2017 को प्रकाशित एक रिपोर्ट मिली, जिसमें एक पीड़ित सीआरपीएफ जवान विकी विश्वकर्मा का बयान भी मौजूद था.

उन्होंने बताया था कि “मैं 9 अप्रैल को श्रीनगर लोकसभा उपचुनाव के दौरान चुनाव ड्यूटी पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की सुरक्षा का प्रभारी था. ड्यूटी पूरी करने के बाद जब मैं अपने साथियों के साथ घर लौट रहा था तो कुछ कश्मीरी युवकों ने हमें परेशान किया और हमारे साथ दुर्व्यवहार किया. उन्होंने गो इंडिया गो बैक और “पाकिस्तान ज़िंदाबाद” जैसे भारत-विरोधी नारे लगाए और हम पर पत्थर फेंके.उस समय हमने उनके खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं समझा. हमें लगा कि संयम बरतना ज़रूरी है. मैंने अपना धैर्य बनाए रखा और शांतिपूर्वक कंट्रोल रूम को फोन करके अधिकारियों को पूरी घटना की जानकारी दी”.
गौरतलब है जिस दौरान यह घटना घटी थी, उस दौरान जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी की सरकार थी. उस दौरान महबूबा मुफ्ती जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री थीं और भाजपा नेता निर्मल सिंह उप-मुख्यमंत्री थे.
Conclusion
हमारी जांच में मिले साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि कश्मीर में 2014 से पहले सेना के जवानों की स्थिति का बताकर वायरल हो रहा यह वीडियो असल में अप्रैल 2017 का है.
Our Sources
Video Shared by Randeep Hooda X account on 13th April 2017
Article Published by HT on 14th April 2017
Article Published by Indian Express on 14th April 2017
Article Published by India Today on 19th April 2017
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