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कर्नाटक चुनाव में मुद्दा बना म्हादाई जलविवाद क्या सुलझ गया है? पढ़ें यह रिपोर्ट

गोवा में विपक्षी पार्टियों ने म्हादई के पानी के मुद्दे पर गोवा के मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट इस विवाद पर 13 फरवरी को सुनवाई करेगा तो दूसरी ओर, म्हादई मुद्दे पर अमित शाह की टिप्पणी गोवा में विरोध और स्थानीय गुस्से को बढ़ा रही है।

28 जनवरी को उत्तरी कर्नाटक में एक रैली में बोलते हुए अमित शाह ने कहा, “दोस्तों, भारतीय जनता पार्टी ने दो राज्यों कर्नाटक और गोवा के बीच इतने पुराने विवाद को सुलझाकर कर्नाटक को म्हादई का पानी देकर कर्नाटक के कई जिलों के किसानों के लिए बहुत अच्छा काम किया है।”

शाह के बयान का मतलब है कि बीजेपी के मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व वाली दोनों सरकारों के बीच सहमति बन गई है। हालांकि, गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा, “हम पानी की हर बूंद के लिए लड़ते रहेंगे जो गोवा का अधिकार है।” फिलहाल विपक्षी दल अमित शाह के बयान के आधार पर प्रमोद सावंत के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि कर्नाटक राज्य में अगले दो महीने में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इस क्षेत्र में पानी एक विवादास्पद मुद्दा है।

यह मुद्दा क्या है और यह विवादास्पद क्यों है और क्यों इस पर कानूनी लड़ाई चल रही है? इस लेख में हम देखेंगे कि परियोजना की स्थिति और कानूनी लड़ाई की स्थिति क्या है?

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस चुनाव में सत्ता पर काबिज होने के लिए बीजेपी और कांग्रेस समेत अन्य क्षेत्रीय पार्टियां काम कर रही हैं। सभी राजनीतिक दलों ने चुनाव की तैयारी शुरू कर दी हैं। कर्नाटक की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी दोबारा सत्ता में आने की तैयारी कर रही है। बीजेपी ने कर्नाटक में अपनी विजय संकल्प यात्रा भी शुरू कर दी है। हाल ही में पार्टी नेता व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बेलगाम जिले के एम .के हुबली में विजय संकल्प यात्रा निकाली गई। इस अवसर पर उन्होंने दर्शकों को संबोधित करते हुए कर्नाटक के धारवाड़, हुबली, नरगुंद और नवलगुंद क्षेत्र के किसानों के लिए पानी से जुड़ा यह बयान दिया था। इस बयान के साथ ही इस जल विवाद का मुद्दा एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है।

जानिए अमित शाह ने क्या कहा?

म्हादई नदी जल मुद्दे पर अमित शाह ने कहा, “साथियों, मैं कर्नाटक के नेताओं और मुख्यमंत्री को बधाई देना चाहता हूं कि मुख्यमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी की गोवा सरकार के साथ मिलकर कर्नाटक की प्यासी धरती को पानी उपलब्ध कराने का बहुत अच्छा काम किया है। आज मैं मैडम सोनिया गांधी का 2007 में गोवा में दिया गया भाषण याद करना चाहूंगा। उन्होंने कहा कि वह म्हादई के पानी को कर्नाटक की ओर मोड़ने नहीं देंगे। कांग्रेस ने अपने 2022 के घोषणापत्र में कहा था कि कांग्रेस पार्टी यह सुनिश्चित करेगी कि कर्नाटक को महादयी के पानी की एक बूंद भी नहीं मिले. दोस्तों, मैं आज आपको यह बताने आया हूं कि भारतीय जनता पार्टी ने कर्नाटक के कई जिलों के किसानों के लिए दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाकर और कर्नाटक को महादई का पानी देकर बहुत अच्छा काम किया है।” बेलगावी से अमित शाह के भाषण का लाइव वीडियो यहां देखा जा सकता है।

Courtesy:Facebook/Belagvisuddi

इस कार्यक्रम में अमित शाह और भाजपा के अन्य नेताओं द्वारा दिए गए भाषणों को देख सकते हैं। इसके अलावा नीचे संलग्न किए गए लंबे वीडियो में से उस हिस्से को देखा जा सकता है कि अमित शाह ने म्हादई नदी के पानी के मुद्दे पर वास्तव में क्या कहा।

Courtesy:Facebook/Belagvisuddi

बेलगावी सुद्दी के डाउनलोड किए गए वीडियो का हिस्सा

अमित शाह के बयान का मतलब है कि कई सालों से चले आ रहे इस मुद्दे पर गोवा और कर्नाटक में सहमति बन गई है। इससे अब कर्नाटक को म्हादई नदी से पानी मिल सकेगा। इसका मतलब यह हुआ कि इतने सालों से इस पानी को मुहैया कराने का गोवा सरकार का विरोध अब वापस ले लिया गया है।

क्या अब गोवा सरकार ने अपना विरोध वापस ले लिया है? इस संबंध में हमने कुछ कीवर्ड सर्च किया। हमें तरुण भारत द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट की मानें तो अमित शाह के बयान के बाद गोवा राज्य में इसका काफी प्रभाव पड़ा है । बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा प्रकाशित खबर के मुताबिक गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत के इस्तीफे की मांग की गई थी। हमें गोवा के मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करने वाली एक और रिपोर्ट मिली।

tarunbharat.com का स्क्रीनग्रैब

गोवा में विपक्ष जहां आक्रामक हो गया है, वहीं क्या गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने म्हादई नदी जल मुद्दे पर कर्नाटक को पानी देने की अनुमति दे दी है? हमने कुछ कीवर्ड की मदद से सर्च किया तो हमें गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत का 28 जनवरी 2023 को किया गया एक ट्वीट मिला।

ट्वीट के कैप्शन के अनुसार, “हमने माननीय सर्वोच्च न्यायालय से म्हादई मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग की है। हम गोवा के पानी की एक-एक बूंद के लिए लड़ते रहेंगे। कर्नाटक की डीपीआर को भी जरूरी पर्यावरणीय मंजूरी नहीं मिली है। मैं गोवा के लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि मेरी सरकार गोवा के हितों की रक्षा करेगी।” 

इससे हमने देखा कि गोवा सरकार ने कर्नाटक को म्हादई नदी का पानी देने की कोई अनुमति नहीं दी है। कर्नाटक को पर्यावरण मंजूरी नहीं मिली है और विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

म्हादई नदी जल विवाद वास्तव में क्या है?

कर्नाटक और गोवा के बीच वास्तव में क्या विवाद चल रहा है? जब हमने गूगल पर कुछ कीवर्ड सर्च किया तो हमें इंडियन एक्सप्रेस द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2002 से यह मुद्दा कैसे शुरू हुआ और कैसे गोवा और महाराष्ट्र इसका विरोध कर रहे हैं। 1980 से इस प्रोजेक्ट की चर्चा हो रही थी। 2002 में कर्नाटक में जब कांग्रेस के एस.एम. कृष्णा मुख्यमंत्री थे, कर्नाटक ने खानापुर तालुका में कलसा और भंडुरा नामक दो नहरों पर बांध बनाने और मलप्रभा नदी के माध्यम से कर्नाटक के धारवाड़ जिले में पानी मोड़ने की परियोजना को आगे बढ़ाया गया। 2006 में कर्नाटक में भाजपा और जेडीएस के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद इस परियोजना ने गति पकड़ी, लेकिन लगातार हो रहे विरोध के कारण यह परियोजना रुकी हुई है और न्यायिक विवाद चल रहा है। 2010 में यूपीए सरकार ने ट्रिब्यूनल नियुक्त कर जल विवाद को सुलझाने की कोशिश की थी।

कलसा और भंडुरा में बांध बनाकर खानापुर से बहने वाली मलप्रभा नदी के जल स्तर को नहर के माध्यम से बढ़ाने के लिए कर्नाटक की परियोजना क्या है और गोवा के साथ कर्नाटक में स्थित कनकुंबी और खानापुर तालुकों के नागरिक क्यों इसका विरोध क्यों कर रहे है? खोजने पर हमें RDXGOA GOA NEWS नामक यूट्यूब चैनल पर गोवा के महाधिवक्ता देवीदास पंगम का एक वीडियो मिला । इसमें म्हादई नदी के स्रोत, उसके बेसिन और सटीक स्थिति के बारे में बताया गया है।

हमने दैनिक पुढारी के स्थानीय पत्रकार वासुदेव चौगुले से यह पता लगाने के लिए संपर्क किया कि गोवा और कर्नाटक के सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिक म्हादई बेसिन से पानी लेने की कर्नाटक की योजना का विरोध क्यों कर रहे हैं? 

वासुदेव चौगले ने Newschecker से कहा, “म्हादई नदी बेलगाम जिले के खानापुर तालुका से निकलती है। कलसा और भांडुरा का पानी गोवा में जाता है। इनमें से कलसा खानपुर से 37 किमी दूर कनकुंबी के पास है, जबकि भंडुरा खानापुर से 12 किमी दूर नेरसा में है। कर्नाटक सरकार इन दोनों धाराओं पर बांध बनाने और इस पानी को नहर के माध्यम से खानापुर से बहने वाली मालप्रभा नदी में छोड़ने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने हमें बताया, “इनमें से कलसा नहर का काम पूरा हो चुका है, लेकिन गोवा सरकार का विरोध समस्याग्रस्त रहा है। अगर इन दोनों नहरों के पानी को गोवा जाने से रोका गया तो इसका असर म्हादई नदी के तल पर पड़ेगा और मस्त्य उद्योग संकट में पड़ जाएगा और पेयजल संकट गंभीर हो जाएगा। इसी के चलते गोवा सरकार इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रही है। स्थानीय लोग इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि पश्चिमी घाट की प्राकृतिक सुंदरता को नुकसान पहुंचेगा और नदी के किनारे बसे गांव जैसे खानापुर, असोगा, यडोगा, बलोगा, कुप्पटगिरी आदि गावों को मलप्रभा नदी की अपर्याप्त क्षमता में पानी बढ़ने से बाढ़ संकट का सामना करना पड़ेगा। स्थानीय लोगों के लिए खानापुर तालुका के संसाधनों का उपयोग करने का कोई प्रावधान नहीं है। यह विरोध का कारण है। साथ ही यह इलाका महाराष्ट्र कर्नाटक सीमा विवाद में फंसा हुआ है, जहां महाराष्ट्र ने विवादित क्षेत्र पर अपना अधिकार जता दिया है, वहीं महाराष्ट्र सरकार इस मुद्दे पर मैदान में कूद पड़ी है कि विवाद सुलझने से पहले ही कर्नाटक को पानी नहीं दिया जाना चाहिए।” 

क्या है कर्नाटक का मौजूदा दावा?

हमें स्थानीय पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों ने बताया कि म्हादाई नदी बेलगाम जिले के खानापुर तालुका से निकलती है। कलसा और भांडुरा का पानी गोवा में जाता है। इसलिए कर्नाटक का दावा है कि हम धारवाड़ जिले के पानी की कमी वाले इलाकों में पानी पहुंचाएंगे। कर्नाटक सरकार शुरू से ही इस बात पर अड़ी हुई है कि पानी हमारा है।  

उन्होंने बताया कि 1980 के बाद से कर्नाटक की सभी सरकारों ने इस संबंध में कड़ा रुख अपनाया है। वे नरगुंद और नवलगुंद क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति करने के लिए कलसा और भंडुरा दोनों नालों को मलप्रभा नदी में मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। महाराष्ट्र की सीमा में आने वाली हरताल धारा को भी उसी नहर पर मोड़ने का प्रयास किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन कतरकी ने Newschecker को बताया कि गोवा सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका के संबंध में अभी तक कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है। इस संबंध में कर्नाटक के अधिकार के लिए अदालत में बहस होगी। अधिसूचना के बाद इस संबंध में स्पष्ट निर्णय लिया जा सकता है।

हमने उनसे पूछा कि इस तथ्य पर कर्नाटक का क्या रुख होगा कि गोवा सरकार ने केंद्रीय जल आयोग की अनुमति पर आपत्ति जताई थी और क्या इस पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई होगी। उस वक्त उन्होंने कहा था, ‘हमें गोवा की आपत्ति के बारे में कोई नोटिस नहीं मिला है और उसके बाद ही हम जरूरी कानूनी प्रक्रिया करेंगे। इसके बारे में बाद में बात करना बेहतर होगा। उनका जवाब आने पर हम लेख अपडेट करेंगे। 

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने घोषणा की कि केंद्र ने उनके राज्य में कलसा-भंडुरा बांध परियोजना को मंजूरी दे दी है। राज्य विधानसभा में केंद्र सरकार के फैसले की घोषणा करते हुए, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने इसे किसानों के 30 साल के संघर्ष की “जीत” और क्षेत्र के लोगों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से एक “उपहार” कहा। यह घोषणा होते ही गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत भी दिल्ली पहुंचे हैं और मांग की है कि इस मुद्दे पर गोवा को न्याय मिले।

Screengrab of The Goan Network

कानूनी विवाद की सटीक प्रकृति के बारे में जानने के लिए हमने कुछ कीवर्ड सर्च किया। हमें 04 जनवरी, 2023 को The Newsminute की वेबसाइट पर छपी एक रिपोर्ट मिली। इसके अनुसार, “2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एस.एम. कृष्णा के नेतृत्व में कर्नाटक सरकार ने परियोजना को पुनर्जीवित करने का फैसला किया और केंद्र सरकार से मंजूरी प्राप्त की। हालाँकि, तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व वाली गोवा सरकार ने केंद्र सरकार से संपर्क किया और महादयी जल विवाद न्यायाधिकरण के गठन का अनुरोध किया ताकि स्थिति का आंकलन किया जा सके और विवाद में शामिल तीन राज्यों कर्नाटक, महाराष्ट्र और गोवा को जल आवंटन को मंजूरी दी जा सके। उसके बाद, केंद्र सरकार ने परियोजना की मंजूरी रोक दी।”

रिपोर्ट के अनुसार, “2006 में, कर्नाटक में तत्कालीन भाजपा-जद (एस) गठबंधन सरकार ने परियोजना के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया, जिससे गोवा को पानी के बंटवारे के विवाद को हल करने के लिए एक न्यायाधिकरण स्थापित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। केंद्र सरकार ने आखिरकार 2010 में महादयी जल विवाद न्यायाधिकरण की स्थापना की। 2018 में, महादयी नदी बेसिन से 13.42 टीएमसी (1000 मिलियन क्यूबिक फीट) पानी कर्नाटक को, 1.33 टीएमसी महाराष्ट्र को और 24 टीएमसी गोवा को छोड़ा गया था। कर्नाटक के 13.42 टीएमसी के आवंटन में, 5.5 टीएमसी पेयजल की जरूरतों के लिए निर्धारित किया गया था, जबकि शेष जल-विद्युत उत्पादन के लिए है। पीने के पानी के लिए आवंटित 5.5 टीएमसी में से 3.8 टीएमसी को कलसा और भंडुरा नालों (नहरों) के माध्यम से मलप्रभा बेसिन में मोड़ा जाना था। यह आवंटन फरवरी 2020 में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया था।”

रिपोर्ट के मुताबिक, “गोवा ने जुलाई 2019 में सुप्रीम कोर्ट में जल आवंटन को चुनौती देते हुए एक विशेष याचिका (एसएलपी) दायर की और अक्टूबर 2020 में विवाद जारी रहा जब कर्नाटक ने म्हादई बेसिन से पानी के अवैध डायवर्जन का आरोप लगाते हुए एक अवमानना ​​​​याचिका दायर की। इस विवाद पर महाराष्ट्र ने एक सिविल अपील भी दायर की थी। चल रहे कानूनी मुद्दों के बावजूद, कर्नाटक सरकार ने अब केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) से अनुमोदन प्राप्त करने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की अपनी मंशा जाहिर की है। हालांकि, इसे अभी भी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी का इंतजार है। सीडब्ल्यूसी ने कहा कि इसकी मंजूरी सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र, कर्नाटक और गोवा राज्यों द्वारा दायर तीन एसएलपी में फैसलों के अधीन है। ये याचिकाएं 2018 में म्हादई जल विवाद न्यायाधिकरण द्वारा जारी परियोजना पर अंतिम निर्णय से संबंधित हैं।” 

कर्नाटक द्वारा दी गई अनुमति के दावे पर गोवा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक चुनौती दायर की है और हमने लाइव लॉ द्वारा उपलब्ध कराई गई खबर में देखा है कि इस संबंध में सुनवाई 13 फरवरी को होगी।

Courtesy: LiveLaw

गोवा का विरोध क्यों?

कर्नाटक परियोजना का गोवा सरकार और पर्यावरण समूहों ने विरोध किया है। शुरुआत से ही इस आंदोलन में शामिल रहे पर्यावरणविद राजेंद्र केरकर से जब हमने इसका कारण जानने के लिए संपर्क किया तो उन्होंने कहा, “हम इस परियोजना के खिलाफ हैं क्योंकि यह प्रकृति, वन्य जीवन और पर्यावरण के लिहाज से पूरी तरह से खतरनाक है।” 

“परियोजना चोरला आरक्षित वन क्षेत्र में आती है। यह 1999 में अधिसूचित म्हादई अभयारण्य से भी गुजरती है। कस्तूरीरंगन समिति द्वारा इस क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है। केंद्रीय वन, पर्यावरण और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की नजर में यह परियोजना पूरी तरह अवैध है। कनकुंबी में क्षेत्रीय वन विभाग द्वारा एक दशक से लगाए गए ट्रैप कैमरों से क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी का आधिकारिक तौर पर खुलासा हुआ है। बाघों के आवास सहित इस क्षेत्र में छह बांध और तीन बांध परियोजनाओं की योजना बनाना गलत है। मलप्रभा को पुनर्जीवित करने के लिए जलग्रहण क्षेत्रों में वृक्षारोपण की आवश्यकता है। वन्यजीव अधिनियम, 1972 का उल्लंघन किया जा रहा है और सभी परमिट प्राप्त करना मुश्किल है।” 

अदालती लड़ाई की मौजूदा स्थिति

इस संबंध में अदालती लड़ाई की मौजूदा स्थिति जानने के लिए हमने गोवा सरकार के महाधिवक्ता देवीदास पंगम से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया, “कर्नाटक यह कहकर हमारे पानी को निकालने की कोशिश कर रहा है कि हमें केंद्रीय जल आयोग से अनुमति मिली है और हमने इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। उसकी सुनवाई जल्द होगी। कर्नाटक वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन में कानून द्वारा निषिद्ध म्हादई अभयारण्य से ऐसे पानी को मोड़ नहीं सकता है। यह केंद्र सरकार का कानून है और प्रयास अवैध हैं। केंद्रीय जल आयोग में यह विषय नहीं आता है। म्हादई ट्रिब्यूनल में साफ लिखा है कि सिर्फ केंद्रीय जल आयोग की अनुमति मिलने पर यह प्रोजेक्ट नहीं हो सकता। वन और पर्यावरण मंत्रालय की अनुमतियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं और उन पर अदालती लड़ाई जारी रहेगी।” 

वर्तमान स्थिति क्या है?

म्हादई नदी घाटी की जानकारी आप गूगल मैप पर यहाँ प्राप्त कर सकते हैं। गोवा ऑब्जर्वर पर इसकी स्थिति को यहां देखा जा सकता है।

Courtesy: The Goa Observer

म्हादई नदी जल संचयन परियोजना की जानकारी हम गूगल मैप और जियो लोकेशन के जरिए भी प्राप्त कर सकते हैं।

साथ ही स्थानीय स्तर पर प्राप्त ये तस्वीरें हमें कनकुंबी और आसपास के क्षेत्र में नहर के निर्माण की स्थिति भी बताती हैं।

Conclusion

म्हादई नदी के पानी पर कर्नाटक के दावे और उस पर विवाद के साथ-साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की पड़ताल करते हुए, हमें परियोजना को पूर्ण स्वीकृति मिलने के संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। इस परियोजना की अनुमति को लेकर चल रहा मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और ये कोर्ट के फैसले के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

(This Explainer was originally Published in Newschecker Marathi)

Our Sources
Live coverage by Belgavi Suddi

Tweet made by Goa CM Dr. Pramod Sawant

Video Published by  RDXGOA GOA NEWS

News Published by Tarun Bharat

Article  Published by The news minute

Article Published by Indian Express

Conversation with Envoirnmetalist Rajendra Kerkar, Advocate general of Goa Devidas Pangam and Karnatakas Advocate Mohan Kataraki

Photo: Special arrangements

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