शनिवार, सितम्बर 30, 2023
शनिवार, सितम्बर 30, 2023

होमFact CheckFact Check: बांग्लादेश का दो साल पुराना वीडियो पश्चिम बंगाल का बताकर...

Fact Check: बांग्लादेश का दो साल पुराना वीडियो पश्चिम बंगाल का बताकर झूठे सांप्रदायिक दावे के साथ वायरल

Authors

With a penchant for reading, writing and asking questions, Paromita joined the fight to combat and spread awareness about fake news. Fact-checking is about research and asking questions, and that is what she loves to do.

An enthusiastic journalist, researcher and fact-checker, Shubham believes in maintaining the sanctity of facts and wants to create awareness about misinformation and its perils. Shubham has studied Mathematics at the Banaras Hindu University and holds a diploma in Hindi Journalism from the Indian Institute of Mass Communication. He has worked in The Print, UNI and Inshorts before joining Newschecker.

Since 2011, JP has been a media professional working as a reporter, editor, researcher and mass presenter. His mission to save society from the ill effects of disinformation led him to become a fact-checker. He has an MA in Political Science and Mass Communication.

Claim:
पश्चिम बंगाल में एक घायल जवान को ले जाते समय मुसलमानों ने घेरकर गाड़ियां रोक लीं।
Fact:
यह दावा भ्रामक है। वायरल वीडियो बांग्लादेश का है।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है, जिसमें कुछ हथियार बंद लोग एक वाहन को बीच सड़क पर रोकते हुए नज़र आ रहे हैं। वीडियो को शेयर कर इसे पश्चिम बंगाल का बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि बंगाल में एक घायल जवान को ले जाते समय मुसलमानों ने घेरकर गाड़ियां रोक लीं।

Fact Check/Verification

दावे की सत्यता जानने के लिए हमने वीडियो को ध्यान से देखा। इसमें भीड़ द्वारा लगाए गए नारे को ध्यान से सुनने पर समझ आया कि यह भाषा पूर्वी बंगाल (बांग्लादेश) में बोली जाती है। भीड़ में मौजूद कुछ लोग ‘नारा ए तकबीर’ का नारा लगाते हुए नज़र आ रहे हैं। 

इसके अलावा, सेना की गाड़ी का नंबर प्लेट बंगाली भाषा में लिखा हुआ है. वाहनों में दिख रहे सैनिकों की वर्दी के कंधों पर ‘AMC’ लिखा हुआ है। इस लोगो को गूगल सर्च करने पर पता चला कि ये बांग्लादेश आर्मी मेडिकल कॉलेज के जवान हैं।

इसके अलावा, वीडियो में हमें एम्बुलेंस नज़र आया जिस पर एक साइन दिखा। इसे हमने गूगल सर्च किया तो पता चला कि यह बांग्लादेश की आर्मी का प्रतीक चिन्ह है।

(Left) Symbol Shown on Ambulance in Viral Video (Right) Insignia of Bangladesh Army (Wikimedia)

कुछ कीवर्ड सर्च करने पर हमें 8 अप्रैल 2021 को किया गया एक ट्वीट मिला, जिसमें वायरल वीडियो को बांग्लादेश का बताया गया है। इससे यह स्पष्ट है कि वीडियो कम से कम दो साल पहले से इंटरनेट पर मौजूद है। 

कीवर्ड सर्च के दौरान फेसबुक पर’ बांग्ला भाषा के एक पेज पर वायरल वीडियो का लंबा वर्जन मिला। इसे 6 जुलाई, 2021 को अपलोड किया गया था। वीडियो के साथ लिखे कैप्शन में बताया गया है ‘हिफाजत-ए-इस्लाम कार्यकर्ताओं द्वारा बांग्लादेश की सेना के साथ अमानवीय कृत्य।’ रिपोर्ट में बताया गया है कि एक घायल सैन्य अधिकारी को टीजी अस्पताल ले जाया जा रहा था। उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट भी दिखाई, फिर भी कार्यकर्ताओं ने सेना के अधिकारियों को नहीं जाने दिया।

कुछ कीवर्ड्स सर्च करने पर हमें यह वीडियो कई फेसबुक पेजों पर मिला, जिन्हें 29 और 30 मार्च 2021 को अपलोड किया गया था। वीडियो को यहां और यहां देखा जा सकता है ।

इसके अलावा, हमें बीबीसी बांग्ला की वेबसाइट पर 13 अप्रैल 2021 को प्रकाशित एक रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पीएम नरेंद्र मोदी की बांग्लादेश यात्रा के आसपास स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। हिफाजत इस्लाम के समर्थकों ने ब्राह्मणबारिया, हाथजारी, ढाका के कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि शुक्रवार की नमाज के बाद हिफाजत इस्लाम के छात्रों ने बांग्लादेश के विभिन्न स्थानों में विरोध प्रदर्शन किया। इस संंबंध में बांग्लादेश के कई अन्य मीडिया संस्थानों ने भी रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसे आप यहां देख सकते हैं। 

यह भी पढ़ें: Fact Check: इटावा में पति ने की पत्नी के साथ क्रूरता, वीडियो झूठे सांप्रदायिक दावे के साथ हुआ वायरल

Conclusion

कुल मिलाकर निष्कर्ष निकलता है कि बांग्लादेश का दो साल पुराना वीडियो पश्चिम बंगाल का बताकर गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। 

Result: False

Our Sources
BBC Bangla report from 13 April 2021
NewsBangla24.com report published on 28 March 2021
Facebook posts

किसी संदिग्ध ख़बर की पड़ताल, संशोधन या अन्य सुझावों के लिए हमें WhatsApp करें: 9999499044 या ई-मेल करें: checkthis@newschecker.in

Authors

With a penchant for reading, writing and asking questions, Paromita joined the fight to combat and spread awareness about fake news. Fact-checking is about research and asking questions, and that is what she loves to do.

An enthusiastic journalist, researcher and fact-checker, Shubham believes in maintaining the sanctity of facts and wants to create awareness about misinformation and its perils. Shubham has studied Mathematics at the Banaras Hindu University and holds a diploma in Hindi Journalism from the Indian Institute of Mass Communication. He has worked in The Print, UNI and Inshorts before joining Newschecker.

Since 2011, JP has been a media professional working as a reporter, editor, researcher and mass presenter. His mission to save society from the ill effects of disinformation led him to become a fact-checker. He has an MA in Political Science and Mass Communication.

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Most Popular