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रांची में रामनवमी से पहले ड्रोन से निगरानी का वीडियो सांप्रदायिक दावे से हुआ वायरल

Claim
झारखंड पुलिस ने ड्रोन से निगरानी में पाया कि रामनवमी से पहले धर्म विशेष की छत पर पत्थर रखे गए थे.

Fact
रांची पुलिस ने वायरल दावे का खंडन किया है.

सोशल मीडिया पर रामनवमी से एक दिन पहले ड्रोन से निगरानी का एक वीडियो काफ़ी वायरल हुआ. वीडियो को सांप्रदायिक दावे से शेयर करते हुए यह कहा गया कि झारखंड की रांची पुलिस ने ड्रोन निगरानी में पाया कि रामनवमी जुलूस से पहले कई घरों की छत पर पत्थर रखे गए थे और ये घर धर्म विशेष के थे”.

हालांकि हमने अपनी जांच में पाया कि वायरल दावा गलत है. रांची पुलिस ने घर की छत पर रखे निर्माण सामग्री को लेकर किसी एक धर्म के लोगों को नोटिस नहीं दिए थे.

वायरल दावे को X पर शेयर करते हुए लिखा गया कि ड्रोन के जरिए निगरानी के दौरान झारखंड पुलिस ने पाया कि रांची में रामनवमी जुलूस मार्ग पर कई घरों की छतों पर पत्थर रखे गए थे.. और ये घर जिहादियों के हैं… हर बार की तरह इस बार भी इन जिहादियों का जुलूस पर पत्थरबाजी करने का प्लान था.

   Courtesy: X/thakurbjpdelhi

इसके अलावा कई अन्य X अकाउंट से भी इस तरह के दावे को शेयर किया गया.

इतना ही नहीं, टाइम्स नाउ समेत कुछ आउटलेट ने भी इसी तरह के दावे से वीडियो को शेयर किया. 

Fact Check/ Verification

Newschecker ने वायरल दावे की पड़ताल के लिए सबसे पहले संबंधित कीवर्ड की मदद से सर्च किया तो हमें 17 अप्रैल 2024 को प्रकाशित डेली पायनियर की रिपोर्ट मिली, जिसमें कहा गया था कि रांची पुलिस रामनवमी को लेकर हाई अलर्ट पर है, ताकि किसी भी तरह की घटना को रोका जा सके.

रिपोर्ट में यह भी लिखा हुआ था कि ‘पुलिस ने बुधवार को शहर में रामनवमी जुलूस के रूट का निरीक्षण किया. कोतवाली डीवाईएसपी प्रकाश सोय ने रांची के मेन रोड, हिंदपीढ़ी और डेली मार्केट इलाकों में ड्रोन से निगरानी की. इस दौरान पता चला कि हिंदपीढ़ी और डेली मार्केट के आठ घरों की छत पर पत्थर रखे हुए हैं. पुलिस ने सभी आठ मकान मालिकों को नोटिस भेजा और मकान मालिकों को जल्द से जल्द छत से पत्थर हटाने के लिए कहा.

रिपोर्ट में यह भी लिखा हुआ था कि कोतवाली डीवाईएसपी प्रकाश सोय ने यह भी कहा कि अगर जुलूस के दौरान कोई विवाद होता है, तो जिस व्यक्ति की छत पर पत्थर पाए गए, उसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा.

इसी तरह की कई अन्य रिपोर्टें हमें दूसरी न्यूज़ वेबसाइट पर भी मिलीं, जिनमें बताया गया था कि रामनवमी जुलूस में सुरक्षा बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस ने ड्रोन से निगरानी की थी.

जांच में हमें रांची पुलिस के आधिकारिक X अकाउंट से किया गया एक रिप्लाई भी मिला, जिसमें यूज़र ने वायरल वीडियो के संदर्भ में जानकारी चाही थी. रांची पुलिस ने ट्वीट करते हुए लिखा कि “जुलूस के मार्गों की ड्रोन से निगरानी एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है. यह अनेक जिलों में किया जाता है और यदि किसी के छत पर कोई निर्माण सामग्री या पत्थर ,ईट ,बालू आदि पड़ा रहता है तो उसे हटाने के लिए संबंधित मकान मालिकों को कहा जाता है. रांची जिला में भी ऐसा नोटिस मकान मालिकों को दिया गया। इसमें कहीं कोई सांप्रदायिक अथवा षड्यंत्र वाला आयाम नहीं है. *षड्यंत्र को बेनकाब* करने जैसे सनसनीखेज खबर बिना किसी ठोस आधार के किसी न्यूज चैनल के द्वारा चलाना विधि सम्मत नही है.”

इसी दौरान हमें रांची पुलिस की तरफ से 17 अप्रैल को किया गया ट्विटर थ्रेड भी मिला, जिसमें लिखा हुआ था कि “विधि-व्यवस्था संघारण हेतु ड्रोन कैमरा द्वारा सर्वे किया जाना एक मानक प्रक्रिया(SOP) है. ड्रोन सर्वे के दौरान पाये गये निर्माण सामग्री को हटाने का निर्देश मकान मालिक को दिया गया था. जिसके अनुपालन में मकान मालिकों ने निर्माण सामग्रियां छतों पर से हटा दी हैं. निर्माण सामग्रियों के अवशेष और ईट वगैरह जिन लोगों के घर पर पाया गया है, उनमें दोनो समुदाय के लोग हैं. जो छत पर सामान पाए गए थे वह किसी षड्यंत्र के लिए रखे गए हो, ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं मिला है”.

आगे रांची पुलिस ने लिखा था कि “समुदाय विशेष के साथ ड्रोन की तस्वीर को जोड़ना एक विद्वेषपूर्ण कारवाई है. पूर्व में ही रांची पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल से मामले को स्पष्ट कर दिया है, अतः अनुरोध है कि भ्रामक खबर न फैलाएं. सभी शोभायात्रा को सुरक्षा जिला प्रशासन द्वारा दी जा रही है. सोशल मीडिया पर भ्रामक व लोक-व्यवस्था भंग करने की मंशा से पोस्ट करने वाले असामाजिक तत्त्वों के विरुद्ध विधिसम्मत कारवाई की जायेगी”.

इस दौरान हमने रांची एसएसपी चंदन कुमार सिन्हा से भी संपर्क किया तो उन्होंने हमें 17 अप्रैल 2024 को किया गया यही ट्वीट थ्रेड भेजा.

इसके बाद हमने गूगल स्ट्रीट व्यू की मदद से वायरल वीडियो में दिख रही जगह को भी खंगाला. हमने इस दौरान दोनों ही समुदायों के करीब तीन दुकानदारों से संपर्क किया. दो दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ड्रोन से निगरानी यह एक रूटीन प्रक्रिया है और हर साल होती है और इसमें कोई सांप्रदायिक दृष्टिकोण नहीं है. इसके अलावा एक अन्य दुकानदार ने बताया कि हमें इस तरह की किसी निगरानी की जानकारी नहीं है.

जांच में हमें झारखंड के मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के आधिकारिक X अकाउंट से किया गया ट्वीट भी मिला. जिसमें लिखा हुआ था कि “कल से कुछ सोशल मीडिया हैंडल पर रांची की हिंदपीढ़ी में कुछ घरों के ऊपर ईंट, पत्थर आदि होने को लेकर भ्रामक खबरें चलाई जा रही हैं. रांची पुलिस ने स्पष्ट किया है कि रूटीन चेक के दौरान 10-11 घरों की छतों पर निर्माण सामग्री मिली थी, जिसे हटवा दिया गया है. इनमें से कुछ घर हाल में बने हैं, जबकि कुछ अभी भी निर्माणाधीन हैं। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन घरों के मालिक विभिन्न समुदायों से आते हैं. कृपया ऐसी अफवाहों पर ध्यान ना दें. झारखंड पुलिस को ऐसी अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ न्यायोचित कार्यवाई करने का निर्देश दिया गया है”.

Conclusion

हमने अपनी जांच में पाया कि रामनवमी जुलूस से पहले रांची पुलिस द्वारा की गई निगरानी का वीडियो सांप्रदायिक दावे से शेयर किया गया है.

Result: Missing Context

Our Sources
Daily Pioneer report, April 17, 2024
Ranchi Police tweet, April 16, 2024
Conversations with shopkeepers from Daily Market, Mahatma Gandhi Main Road, Ranchi
Tweet, chief minister, April 17, 2024

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