मंगलवार, दिसम्बर 6, 2022
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एक कार्टून से आरएसएस द्वारा महात्मा गांधी समेत कई शहीदों के बारे में विवादित टिप्पणी वाला भ्रामक पोस्ट हुआ वायरल

Claim:

गोडसे जिन्दाबाद बोलने वाले इस अखबार में छपे कार्टून कैरेक्टर को समझने की कोशिश करें कि आजादी से पहले आरएसएस, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, भगतसिंह और चंद्र शेखर आजाद गाँधी जी आदि को रावण मानते थे न कि अंग्रेजों को।

Verification:

सोशल मीडिया पर एक सन्देश तेजी से वायरल हो रहा है जिसमे दावा किया गया है कि, आरएसएस सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद एवं महात्मा गाँधी को रावण मानती है। दावे के साथ किसी पत्रिका में छपा एक कार्टून है जिसमे महात्मा गांधी को 10 सिर में दिखाया गया है तथा सामने से दो व्यक्तियों के द्वारा गांधी को तीर मारते दिखाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहे इस दावे पर जब हमारी नजर पड़ी तो हमने इसकी पड़ताल शुरु की।

वायरल तस्वीर को देखने पर पता चलता है कि इसमें सिर्फ कार्टून ही नहीं है बल्कि तस्वीर पर गोडसे और आरएसएस को लेकर दावे किये गए हैं। तस्वीर में लिखा है कि “यह कार्टून 1945 में नारायण आप्टे, प्रकाशित और गोडसे द्वारा सम्पादित पत्रिका अग्रणी में छपा था। गौर से देखे तो गांधी जी के दस सिरों में सरदार पटेल और सुभाष चंद्र बोस भी हैं। साल 1945 में RSS के लिए अंग्रेज रावण नहीं थे बल्कि सभी स्वतंत्रता सेनानी रावण थे। हमने यह जानने का प्रयास किया कि ‘अग्रणी’ नामक इस पत्रिका का सच क्या है। इसी क्रम में हमें नाथूराम गोडसे के द्वारा संपादित ‘अग्रणी’ के विवरण वाले कुछ लेख मिलें। NDTV में छपा यह लेख यह बताता है कि कैसे नाथूराम गोडसे ने ‘अग्रणी’ बंद होने के बाद ‘हिन्दू राष्ट्र’ के नाम पर एक नया समाचार पत्र प्रकाशित किया तो वहीं पत्रिका में छपे इस लेख में भी ‘अग्रणी’ नामक इस पत्रिका से संबंधित जानकारी दी गई है। Indian Express में प्रकाशित लेख के माध्यम से भी इस विषय पर अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

अग्रणी पत्रिका के बारे में जानकारी जुटाने के बाद हमने यह जानने का प्रयास किया कि क्या सच में आरएसएस इस पत्रिका के संपादन में कोई हस्तक्षेप रखता था या फिर सच में यह पत्रिका आरएसएस द्वारा प्रकाशित होती थी। इस संबंध में जानकारी के लिए हमने आरएसएस की आधिकारिक वेबसाइट का रुख किया जहाँ से हमें पता चला कि आरएसएस द्वारा आधिकारिक तौर पर आर्गनाइजर तथा पाञ्चजन्य साप्ताहिकों का प्रकाशन 1947 में शुरू हुआ था जबकि उक्त कार्टून कथित तौर पर 1945 में प्रकाशित हुआ है। इस प्रकार हमें यह पता चला कि इस कार्टून को प्रकाशित करने वाली पत्रिका अग्रणी से आरएसएस का आधिकारिक तौर पर कोई संबंध नहीं था।

अग्रणी नामक पत्रिका में इस तरह का कोई कार्टून प्रकाशित हुआ था या नहीं इस संबंध में हमें अभी कोई विश्वसनीय जानकारी नहीं मिल पाई है। इस विषय पर हमारी पड़ताल अभी जारी है और कोई निर्णायक सबूत मिलने पर हम उसका उल्लेख अपने लेख में करेंगे।

Tools Used:

  • Google Search

Result: Misleading

Saurabh Pandey
Saurabh Pandey
A self-taught social media maverick, Saurabh realised the power of social media early on and began following and analysing false narratives and ‘fake news’ even before he entered the field of fact-checking professionally. He is fascinated with the visual medium, technology and politics, and at Newschecker, where he leads social media strategy, he is a jack of all trades. With a burning desire to uncover the truth behind events that capture people's minds and make sense of the facts in the noisy world of social media, he fact checks misinformation in Hindi and English at Newschecker.
Saurabh Pandey
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A self-taught social media maverick, Saurabh realised the power of social media early on and began following and analysing false narratives and ‘fake news’ even before he entered the field of fact-checking professionally. He is fascinated with the visual medium, technology and politics, and at Newschecker, where he leads social media strategy, he is a jack of all trades. With a burning desire to uncover the truth behind events that capture people's minds and make sense of the facts in the noisy world of social media, he fact checks misinformation in Hindi and English at Newschecker.

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